झाबुआ , अक्टूबर 15 -- मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ, अलीराजपुर और धार जिलों में अवैध शराब, गांजे और कथित मादक पदार्थों के कारोबार से जुड़े मामले सामने आने के बाद चिंता बढ़ गई है। पुलिस और आबकारी विभाग समय-समय पर कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन नशे की आपूर्ति और इसके कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

अलीराजपुर जिले में हाल ही में पुलिस ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए गांजे के 2,400 से अधिक पौधे बरामद किए थे। इनकी अनुमानित बाजार कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी। पुलिस ने करीब पांच से छह हेक्टेयर क्षेत्र में गांजे की खेती करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया था। बताया गया कि कपास की फसल के बीच गांजे के पौधे लगाए गए थे।

इसी तरह झाबुआ जिले के पारा क्षेत्र के कलमोड़ा गांव में कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 20 हजार गांजे के पौधे जब्त किए, जबकि धार जिले की पुलिस ने लगभग तीन हजार पौधे बरामद किए। धार पुलिस के अनुसार, करीब 1,500 किलोग्राम गांजा निकाला जा चुका है और उसकी बाजार कीमत का आकलन किया जा रहा है। इस मामले में डूंगरसिंह और उनके बेटों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, कपास की फसल की आड़ में गांजे की खेती की जा रही थी।

क्षेत्र में अवैध शराब और कथित सफेद पाउडर से जुड़े मामलों में भी पुलिस कार्रवाई करती रही है। झाबुआ, अलीराजपुर और धार की सीमाएं गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र से लगती हैं। ऐसे में नशीले पदार्थों की आपूर्ति और परिवहन से जुड़े संभावित नेटवर्क की जांच महत्वपूर्ण है।

अवैध नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए निगरानी मजबूत करने, आपूर्ति शृंखला की जांच करने और कारोबार के मुख्य संचालकों की पहचान करने की आवश्यकता है। साथ ही, युवाओं को नशे और अवैध गतिविधियों से दूर रखने के लिए जागरूकता और रोकथाम के प्रयास भी जरूरी हैं।

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