सुकमा, अप्रैल 03 -- छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में आत्मसमर्पित युवाओं के पुनर्वास और आजीविका सृजन के प्रयासों के तहत 32 युवाओं को राजमिस्त्री किट प्रदान की गई। जिला मुख्यालय स्थित लाइवलीहुड कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर अमित कुमार ने युवाओं को किट वितरित की और उनसे संवाद किया।

जिला पीआरओ ने शुक्रवार को बताया कि कार्यक्रम में कलेक्टर ने कहा कि पुनर्वास प्रक्रिया का उद्देश्य केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि निर्माण क्षेत्र में लगातार बढ़ती गतिविधियों के चलते राजमिस्त्री कार्य में रोजगार की संभावनाएं मौजूद हैं और यह कौशल युवाओं के लिए स्वरोजगार का माध्यम बन सकता है।

मेसन किट (राजमिस्त्री किट) में निर्माण कार्य से संबंधित आवश्यक उपकरण शामिल हैं, जिनकी मदद से प्रशिक्षित युवा तत्काल कार्य शुरू कर सकते हैं। प्रशासन के अनुसार, इन युवाओं को पहले ही कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है, ताकि वे उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर आय अर्जित कर सकें। किट वितरण के बाद अब उन्हें स्थानीय स्तर पर कार्य अवसरों से जोड़ने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।

जिला प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार की पहल से आत्मसमर्पित युवाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जा सकता है, जिससे वे अपने परिवार की जिम्मेदारियां बेहतर ढंग से निभा सकें। साथ ही इससे क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास नीति के तहत कौशल विकास और रोजगार आधारित कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित कर अधिक से अधिक युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर सकें।

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