नई दिल्ली , अक्टूबर 30 -- रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा है कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को पूरा करने के लिए देश में तकनीकी रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था तैयार करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि इसके लिए स्वदेशी शोध, डिजाइन, विकास और रक्षा उपकरणों के निर्माण की क्षमता बढ़ानी होगी। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र भारत को दूसरे देशों के साथ रक्षा सहयोग में भी अधिक प्रभावी भूमिका निभाने में सक्षम बनाएगा।

श्री सेठ ने शुक्रवार को यहां मानेकशॉ सेंटर में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से सेंटर फॉर ज्वाइंट वारफेयर स्टडीज (सीईएनजेओडब्ल्यूएस) के सहयोग से आयोजित विजन, इनोवेशन, सिनर्जी एंड वैल्यूज का उद्घाटन किया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम 'रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करना' रखी गई थी। इसमें सहयोगी देशों के लिए डीआरडीओ के रक्षा समाधानों और प्रौद्योगिकी साझेदारी पर संगोष्ठी भी हुई।

रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि इस आयोजन के चार प्रमुख आधार 'विजन, इनोवेशन, सिनर्जी और वैल्यूज' हैं। विजन से भविष्य की रक्षा जरूरतों को समझने और उनकी तैयारी करने में मदद मिलेगी। नवाचार के जरिए शोध को उपयोगी तकनीक और समाधान में बदला जा सकेगा। 'सिनर्जी का अर्थ सशस्त्र बलों, शोध संस्थानों, उद्योगों और दूसरे देशों के साझेदारों को साथ लाना है। वहीं, विश्वास, आपसी सम्मान और जिम्मेदारी जैसे मूल्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करेंगे।

उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में नई चुनौतियों से निपटने के लिए शोध और तकनीकी विकास को उपयोगी समाधानों में बदलना जरूरी है। भारतीय वैज्ञानिक, इंजीनियर और उद्योग उन्नत रक्षा तकनीक विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। डीआरडीओ ने भी देश की स्वदेशी रक्षा क्षमता मजबूत करने में अहम योगदान दिया है।

इस अवसर पर श्री सेठ ने डीआरडीओ के रक्षा उत्पादों की विदेशी भाषाओं में तैयार पुस्तिका जारी की। यह पुस्तिका अरबी, स्पेनिश और फ्रेंच भाषाओं में है। इसका उद्देश्य दूसरे देशों को भारत के रक्षा उत्पादों और तकनीकी समाधानों की जानकारी देना तथा उनके साथ संपर्क और सहयोग बढ़ाना है।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि देश की रक्षा तैयारियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए तकनीकी क्षमता, औद्योगिक क्षमता और संस्थागत साझेदारी को एक साथ आगे बढ़ाना जरूरी है।

रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने कहा कि भारत की रक्षा निर्माण क्षमता लगातार बढ़ रही है। अब दूसरे देशों के साथ केवल रक्षा उपकरणों की खरीद-बिक्री तक सीमित रहने के बजाय संयुक्त विकास, मिलकर उत्पादन और निर्माण में साझेदारी के अवसर तलाशे जाने चाहिए। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु में होने वाले एयरो इंडिया 2027 के लिए दूसरे देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों को औपचारिक निमंत्रण भेजे जा रहे हैं। यह आयोजन भारत की बढ़ती विमानन और रक्षा क्षमताओं को प्रदर्शित करने तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का अवसर होगा।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बदलते वैश्विक राजनीतिक और तकनीकी माहौल में रक्षा कूटनीति के बदलते स्वरूप पर बात की। उन्होंने रणनीतिक स्वायत्तता, कई देशों के साथ संतुलित संबंध, आपसी विश्वास और नई तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।

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