जयपुर , नवंबर 20 -- केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने भारत की साइंटिफिक तरक्की, इंडस्ट्रियल ग्रोथ और देश की मज़बूती में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के 175 साल के योगदान की तारीफ़ करते हुए ज़रूरी मिनरल एक्सप्लोरेशन को बढ़ाने, एडवांस्ड एआई एवं एमएल -बेस्ड जियोसाइंस टेक्नोलॉजी को अपनाने और आत्मनिर्भर भारत के विचार का समर्थन करने के लिए भारत के डिज़ास्टर-तैयारी फ्रेमवर्क को मज़बूत करने की ज़रुरत पर ज़ोर दिया।

श्री रेड्डी गुरुवार को यहां जीएसआई के 175वें स्थापना वर्ष के अवसर पर 'अतीत को खोज, भविष्य का निर्माण: जीएसआई के 175 गौरवशाली वर्ष' विषयपर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में बोल रहे थे। उन्होंने विकसित भारत-2047 के विज़न के साथ स्टेकहोल्डर्स से ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी और शेयर्ड साइंटिफिक प्रोग्रेस में योगदान देते हुए देश की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

इस अवसर पर खान मंत्रालय के सचिव पीयूष गोयल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जैसे-जैसे भारत अपनी इकोनॉमिक ग्रोथ तेज़ कर रहा है, उस अनुरूपएक ऐसा मिनरल इकोसिस्टम बनाना ज़रूरी है जो सस्टेनेबल, सेल्फ-रिलायंट, टेक्नोलॉजी में एडवांस्ड और ग्लोबली कॉम्पिटिटिव हो। उन्होंने दोहराया कि खान मंत्रालय कैपेसिटी बिल्डिंग और नेशनल प्रायोरिटीज़ के साथ स्ट्रेटेजिक अलाइनमेंट के ज़रिए जीएसआई और दूसरे स्टेकहोल्डर्स को मज़बूत करना जारी रखेगा।

महानिदेशक एवं संरक्षक (सेमिनार) असित साहा ग्लोबल जियोसाइंस का माहौल तेज़ी से बदल रहा है, इसलिए भविष्य में बेहतर एक्सप्लोरेशन की कोशिशों, स्मार्ट टेक्नोलॉजी और तेज़ साइंटिफिक समझ की ज़रूरत पर जोर दिया। उन्होंने कॉन्सेप्ट आधारित अन्वेषण, एडवांस्ड सबसरफेस इमेजिंग और मज़बूत पब्लिक-गुड जियोसाइंस पर ज़ोर दिया। श्री साहा ने एक्सप्लोरेशन में तेज़ी लाने, इंटीग्रेटेड रिसर्च को गहरा करने, मिनरल रिसोर्स बेस को बढ़ाने और भारत के लॉन्ग-टर्म रिसोर्स सिक्योरिटी और सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों को मज़बूत करने के लिए जीएसआई के कमिटमेंट को फिर से दोहराया।

अपर महानिदेशक, अध्यक्ष (सेमिनार) जीएसआई विजय वी. मुगल ने कहा कि यह सेमिनार न सिर्फ जीएसआई के 175 साल के जियोसाइंटिफिक काम का जश्न है बल्कि इसका मकसद खुले साइंटिफिक आदान-प्रदान एवं नयी सोच को बढ़ावा देना और आने वाले दशकों के लिए जियोसाइंस की प्राथमिकताओं का समरूप दायरा बनाना भी है।

इस अवसर पर राजस्थान के खान एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रधान सचिव टी. रविकांत ने सस्टेनेबल मिनरल डेवलपमेंट के लिए राजस्थान के प्रतिबद्धता और नेशनल मिनरल सिक्योरिटी का समर्थन करने के लिए लगातार इनोवेशन, रिसर्च और कोलेबोरेशन की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

सेमिनार के पहले दिन जीएसआई की 175 साल की विरासत पर विचारार्थ एक अहम प्लेटफ़ॉर्म मिला, साथ ही अलग-अलग थीमैटिक एरिया में आगे की सोच वाली चर्चाओं को आगे बढ़ाया गया, जिसमें ज़रूरी मिनरल, अगली पीढ़ी की एक्सप्लोरेशन टेक्नोलॉजी, जियोडायनामिक्स, क्लाइमेट रेजिलिएंस, डिजिटल और कम्प्यूटेशनल इनोवेशन, और जियोसाइंस पर आधारित सस्टेनेबल डेवलपमेंट शामिल थे। आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के दूरगामी विज़न के साथ, बातचीत में नेशनल रिसोर्स सिक्योरिटी को मज़बूत करने, क्लीन एनर्जी ट्रांज़िशन को मुमकिन बनाने और एनवायरनमेंटल रेजिलिएंस को सपोर्ट करने में जियोसाइंस की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया गया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित