गोरखपुर , अगस्त 23 -- उत्तर प्रदेश में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के पांचवें स्थापना दिवस सप्ताह के उपलक्ष्य में आयोजित ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ स्मृति व्याख्यानमाला के दूसरे दिन रविवार को 'विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कृषि का योगदान' विषय पर व्याख्यान हुआ।
मुख्य वक्ता भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के पूर्व निदेशक डॉ. अश्विनी दत्त पाठक ने कहा कि भारत को विकसित एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने में कृषि क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डॉ. पाठक ने कृषि क्षेत्र के विभिन्न आयामों का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक, नवाचार, कृषि विविधीकरण, मूल्य संवर्धन एवं कृषि-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देकर किसानों की आय तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल से ही भारत की अर्थव्यवस्था कृषि केंद्रित रही है। वर्तमान वैश्विक परिवेश में इसे नवाचार और मूल्य संवर्धन से जोड़ना अति आवश्यक है।
इसी क्रम में 'भारत में प्राकृतिक खेती का वर्तमान परिदृश्य' विषय पर विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए पूर्व संयुक्त कृषि निदेशक अरविंद कुमार ने प्राकृतिक खेती की अवधारणा, इसकी संभावनाओं तथा वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि हानिरहित खाद्य पदार्थाे की बढ़ती मांग ने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में सुनहरा मौका पैदा किया है। श्री सिंह ने विद्यार्थियों को टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। विद्यार्थियों ने दोनों विषयों पर विशेषज्ञों के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना तथा संवाद के माध्यम से कृषि क्षेत्र की समकालीन चुनौतियों एवं संभावनाओं को समझने का प्रयास किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) डॉ. भूपेश कुमार गोयल ने विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीकों, अनुसंधान एवं नवाचार के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
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