नयी दिल्ली , जनवरी 10 -- सेना की पश्चिमी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने कहा है कि पाकिस्तान में न तो भारत के खिलाफ पारंपरिक युद्ध लड़ने का साहस है और न ही क्षमता इसलिए वह केवल आतंकवादी गतिविधियों के जरिये भारत को नुकसान पहुंचाने की नीति पर चलता है। लेफ्टिनेंट जनरल कटियार ने शनिवार को यहां पश्चिमी कमान के अलंकरण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पड़ोसी देश केवल आतंकवादी गतिविधियों के जरिए भारत को नुकसान पहुंचाना चाहता है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले वर्ष के अलंकरण समारोह में भी उन्होंने आगाह किया था कि पश्चिमी मोर्चे पर संघर्ष की संभावना बनी हुई है क्योंकि भारत और पाकिस्तान के संबंध मित्रवत नहीं हो पाए हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के अथक प्रयासों के बावजूद यही स्थिति बनी हुई है क्योंकि पाकिस्तान का शीर्ष नेतृत्व हमेशा उसकी सेना के हाथों में रहा है। सेना दोनों देशों के बीच संघर्ष का माहौल बनाए रखना चाहती है। यदि शांति या मित्रता होगी तो पाकिस्तानी सेना का महत्व कम हो जाएगा। उसका उद्देश्य टकराव की स्थिति को जीवित रखना है।

सेना कमांडर ने कहा कि पहलगाम में जो कुछ हुआ वह सुनियोजित साजिश का हिस्सा था। पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिकों की निर्मम हत्या के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल कटियार ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाया। उन्होंने कहा, "हमने उनके आतंकवादी ठिकानों, उनकी चौकियों और उनके एयरबेस को नष्ट किया। हमें उम्मीद है कि पाकिस्तान इससे सबक लेगा और आगे किसी भी आतंकी गतिविधि को अंजाम नहीं देगा।"सेना को सतर्क और तैयार रहने की चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व अपने देश की आंतरिक समस्याओं से ध्यान भटकाने या अपने स्वार्थ के लिए कोई और दुस्साहस करने की कोशिश कर सकता है।

उन्होंने कहा कि इस स्थिति को देखते हुए पहले से भी अधिक पुख्ता तैयारियां जारी रहनी चाहिए क्योंकि इस बार संघर्ष सीमित नहीं रह सकता। सेना को सभी क्षेत्रों में और हर स्तर पर लड़ने के लिए तैयार रहना होगा।

सेना कमांडर ने कहा कि पश्चिमी सीमा पर युद्ध में देश को अपनी रक्षा सेनाओं से दुश्मन पर निर्णायक विजय की अपेक्षा है और यह तभी संभव होगा जब हम अपनी तैयारियों को बनाए रखें और इन्हें अधिक मजबूत करें। उन्होंने कहा कि दुश्मन की साजिश धर्म का इस्तेमाल कर देश को कमजोर करने की है।

सशस्त्र बलों के समावेशी स्वरूप का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सेना में देश के हर क्षेत्र से, हर धर्म और जाति के लोग हैं और यह एकता में विविधता का जीवंत उदाहरण है जिसे बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने सैनिकों के लिए मजबूत प्रशिक्षण प्रणाली और आधुनिक हथियार प्रणालियों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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