चंडीगढ़ , जून 29 -- अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ ( एआईएसजीईएफ) ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग से कर्मचारियों के विभिन्न भत्तों में व्यापक संशोधन कर उन्हें महंगाई के अनुरूप बनाने की मांग की है।

महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने सोमवार को कहा कि वर्तमान भत्ता व्यवस्था बढ़ती महंगाई, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन पर बढ़ते खर्च के अनुरूप नहीं है, जिससे कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

श्री लांबा ने बताया कि महासंघ ने वेतन आयोग को सौंपे ज्ञापन में महंगाई भत्ता (डी ए) की गणना प्रणाली में बदलाव का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि 12 माह के बजाय तीन या छह माह की औसत अवधि के आधार पर डीए तय किया जाये, पॉइंट-टू-पॉइंट गणना लागू की जाए तथा 25 प्रतिशत डीए होने पर उसे मूल वेतन और मूल पेंशन में विलय किया जाये।

महासंघ ने मकान किराया भत्ता (एचआरए) में भी उल्लेखनीय वृद्धि की मांग करते हुए 50 लाख से अधिक आबादी वाले महानगरों के लिए 40 प्रतिशत, पांच से 50 लाख आबादी वाले शहरों के लिए 35 प्रतिशत तथा पांच लाख से कम आबादी वाले शहरों और कस्बों के लिए 30 प्रतिशत एचआरए निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही एचआरए को महंगाई भत्ते से जोड़ने और शहरों के वर्गीकरण की नियमित समीक्षा करने की भी मांग की गयी है।

परिवहन भत्ता, यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता की मौजूदा दरों को अपर्याप्त बताते हुए महासंघ ने इनमें पर्याप्त बढ़ोतरी, सरकारी कार्यों के लिए सभी कर्मचारियों को हवाई यात्रा की सुविधा तथा यात्रा भत्तों को महंगाई के अनुरूप स्वतः संशोधित करने की व्यवस्था लागू करने की मांग की।

महासंघ ने शिशु शिक्षा भत्ता को उच्च शिक्षा तक बढ़ाने और इसे प्रति बच्चा 10,000 रुपए प्रतिमाह करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा छात्रावास अनुदान को भी महंगाई भत्ते से जोड़ने की मांग की गयी है। जोखिम, कठिन क्षेत्र, रात्रि ड्यूटी, धुलाई, प्रतिनियुक्ति, वर्दी और ओवरटाइम सहित अन्य विशेष भत्तों के पुनरीक्षण तथा कर्मचारियों को मिलने वाले ऋण और अग्रिम राशि की सीमा बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

श्री लांबा ने कहा कि कर्मचारियों को मिलने वाले भत्ते केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि उनकी कार्यक्षमता, मनोबल और सम्मानजनक जीवन का आधार हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आठवां वेतन आयोग सभी भत्तों का व्यापक पुनरीक्षण कर उन्हें महंगाई से जोड़ने तथा समय-समय पर स्वचालित संशोधन की व्यवस्था की सिफारिश करेगा, ताकि कर्मचारियों की वास्तविक क्रयशक्ति सुरक्षित रह सके।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित