कोलकाता , मई 09 -- भारत को आज़ादी मिलने के लगभग आठ दशक बाद पश्चिम बंगाल में शनिवार को श्री शुभेंदु अधिकारी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।
इसके साथ ही राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का औपचारिक रूप से अंत हो गया और एक ऐसे दौर की शुरुआत हुई जिसे भाजपा नेताओं ने "सोनार बांग्ला" युग की शुरुआत बताया है।
शपथ ग्रहण समारोह कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुआ। यह वह जगह है जो अक्सर बंगाल के बदलते राजनीतिक माहौल की मूक गवाह रही है। 'लाल' (वामपंथ) के दौर से लेकर 'हरे' (तृणमूल) के उभार तक और अब 'भगवा' के विशाल सागर तक सभी इस मैदान में समाहित हैं।
राज्यपाल आर. एन. रवि ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती यानी रवींद्र जयंती के दिन पूर्वाह्न 11:32 बजे बंगाली भाषा में श्री अधिकारी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी। भगवा कुर्ता और सफ़ेद पजामा पहने 55 वर्षीय भाजपा नेता ने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। इस मौके पर भारी भीड़ मौजूद थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अध्यक्ष नितिन नवीन और भाजपा शासित लगभग 20 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल थे।
श्री अधिकारी श्री अजय मुखर्जी के बाद पूर्वी मिदनापुर ज़िले से आने वाले पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री है। इस समारोह में बंगाली संस्कृति की झलक साफ़ तौर पर दिखाई दे रही थी। शपथ ग्रहण की कार्यवाही शुरू होने से पहले श्री मोदी ने विशाल और कई स्तरों वाले मंच पर प्रमुखता से रखे गए श्री टैगोर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। श्री टैगोर के अलावा श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी और श्री ईश्वर चंद्र विद्यासागर के चित्र भी मंच के केंद्र में थे, जबकि पृष्ठभूमि में दुर्गा पूजा समारोह, ढाकी (ढोल बजाने वाले), शंख बजाने वाले और मंदिरों की कलाकृतियों को दर्शाने वाले भित्ति चित्र लगे थे। पुरुलिया के छऊ नर्तकों और विभिन्न लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्हें दर्शकों से खूब सराहना मिली।
कुछ ही पलों बाद दिन का सबसे यादगार दृश्य सामने आया। जब हज़ारों लोग "मोदी, मोदी" और "जय श्री राम" के नारे लगा रहे थे, तब प्रधानमंत्री मंच के सामने आए और बंगाल की जनता को "साष्टांग प्रणाम" किया।
श्री मोदी ने बाद में भीड़ के सामने घुटनों के बल बैठकर और साष्टांग प्रणाम करते हुए तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, "मैं पश्चिम बंगाल की जनता की शक्ति के सामने नतमस्तक हूँ।"श्री मोदी की इस भाव-भंगिमा पर समर्थकों ने ज़ोरदार जयकारे लगाए। सत्ता के इस ऐतिहासिक हस्तांतरण को देखने के लिए राज्य भर के अलग-अलग ज़िलों से रात भर का सफ़र तय करके आए थे।
इससे पहले सुबह श्री अधिकारी कोलकाता के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित अपने चिनार पार्क आवास से बाहर निकले, जहाँ भोर से ही इंतज़ार कर रहे समर्थकों ने उनका ज़ोरदार स्वागत किया। इसके बाद उनका काफ़िला फूलों से सजी सड़कों से गुज़रा। इस दौरान शंखनाद हो रहा था और फूलों की वर्षा हो रही थी, जबकि सड़कों के किनारे खड़ी भीड़ भगवा झंडे लहरा रही थी।
ब्रिगेड मैदान के भीतर का माहौल किसी राजनीतिक उत्सव जैसा लग रहा था। भगवा रंग के स्कार्फ़ और पगड़ियाँ पहन रखे हज़ारों लोग सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर जुटने लगे थे। झालमुड़ी, रसगुल्ला और कमल के आकार की संदेश मिठाई बेचने वाले विक्रेताओं का धंधा ज़ोरों पर था, क्योंकि समर्थकों से वह विशाल मैदान खचाखच भरा हुआ था।
भगवा वस्त्र धारण किए साधु-संतों और जंगलमहल क्षेत्र के आदिवासी प्रतिनिधियों की कतारें सबसे आगे की पंक्तियों में बैठी थीं। यह उस सामाजिक गठबंधन को दर्शाता था, जिसने राज्य में भाजपा को सत्ता तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
शपथ ग्रहण करने के बाद श्री अधिकारी ने मोदी और श्री शाह के सामने झुककर प्रणाम किया और मंच पर मौजूद वरिष्ठ नेताओं से आशीर्वाद लिया। एक प्रतीकात्मक भाव के तौर पर, योगी आदित्यनाथ ने अपना भगवा स्कार्फ़ उतारा और उसे श्री अधिकारी को सौंप दिया, जिस पर भीड़ ने एक बार फिर ज़ोरदार तालियाँ बजाईं।
श्री अधिकारी के साथ नये मंत्रिमंडल के पाँच मंत्रियों ने शपथ ली, जिसमें श्री दिलीप घोष, श्रीमती अग्निमित्रा पॉल, श्री अशोक कीर्तनिया, श्री खुदीराम टुडू और श्री निशीथ प्रमाणिक।
देश के अलग-अलग हिस्सों से आए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नेताओं की मौजूदगी ने भाजपा की बंगाल जीत के राष्ट्रीय महत्व को दिखाया। मौजूद लोगों में सर्वश्री एन. चंद्रबाबू नायडू, हिमंत बिस्वा सरमा, देवेंद्र फडणवीस, जे. पी. नड्डा, स्मृति ईरानी और शिवराज सिंह चौहान शामिल थे।अभिनेता से नेता बने मिथुन चक्रवर्ती भी मंच पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत करते दिखे।
कई समर्थकों के लिए, इस दिन का महत्व राजनीति से कहीं ज़्यादा, भावनात्मक था।
संदेशखाली की भाजपा समर्थक संदीप मोंडल ने कहा, "हमें यहाँ होना ही था। उम्मीद है कि यह सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि अब सुंदरबन में कोई ज़ुल्म न हो।" वह इस समारोह में शामिल होने के लिए एक दिन पहले ही कोलकाता आ गई थीं।
वीआईपी घेरे में खड़े होने के बजाय आम कार्यकर्ताओं के बीच खड़े होकर भाजपा के चुने हुए विधायक पीयूष कनोडिया ने कहा, "यह एक ऐतिहासिक दिन है। हम ज़मीनी स्तर के कार्यकर्ता हैं और इसीलिए हम लोगों के साथ खड़े हैं। बंगाल ने बदलाव के लिए वोट दिया है।"जैसे ही ब्रिगेड मैदान में "शुभेंदु अधिकारी की जय" के नारे गूंजे तो भाजपा नेताओं ने इस शपथ ग्रहण समारोह को सिर्फ़व सत्ता का हस्तांतरण नहीं, बल्कि बंगाल के राजनीतिक इतिहास में गहरी जड़ों वाली एक लंबी वैचारिक यात्रा की परिणति के तौर पर पेश किया।
भाजपा ने चुनाव में गई 293 सीटों में से 207 सीटें जीतीं, और इस तरह राज्य में अपनी पहली सरकार बनाई। यह वही राज्य है जो श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि भी है। श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी ही भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे, जो भाजपा का वैचारिक पूर्ववर्ती संगठन था।
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक बेहद भावुक पल आया, जब श्री मोदी ने 97 साल के अनुभवी राष्ट्रवादी नेता माखनलाल सरकार के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। माखनलाल सरकार श्यामा प्रसाद मुखर्जी के लंबे समय से सहयोगी रहे थे और उत्तरी बंगाल में भाजपा के शुरुआती आयोजकों में से एक थे।
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