रांची , जून 22 -- झारखंड के धनबाद में आजसू के 41वें स्थापना दिवस पर आज विशाल जनाक्रोश मार्च निकाला गया।
मार्च का नेतृत्व पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने किया। जनाक्रोश मार्च गोल्फ ग्राउंड से निकलकर कोयला नगर स्थित नेहरू कॉम्प्लेक्स ग्राउंड तक गया। मार्च में झारखंड के सभी जिलों के अलावा ओडिशा और बंगाल से भी हजारों कार्यकर्ता पहुंचे।
जनाक्रोश मार्च में सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी, विधायक निर्मल महतो, पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस, पूर्व विधायक डॉ लंबोदर महतो, मुख्य प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत, केंद्रीय उपाध्यक्ष द्वय प्रवीण प्रभाकर, हसन अंसारी, केंद्रीय महासचिव राजेंद्र मेहता, हरेलाल महतो, संतोष महतो, संजय मेहता, रांची जिप अध्यक्ष निर्मला भगत, नजरुल हसन हाशमी, यशोदा देवी, पार्वती देवी, श्रीमती अंजू देवी, काशीनाथ , हकीम अंसारी , अमित यादव , इम्तियाज नज़मी , प्रियंका शर्मा सिंह, उमेश भोगता, दीपक महतो, अजय सिंह, राधेश्याम गोस्वामी, केंद्रीय मीडिया संयोजक परवाज़ खान,केंद्रीय सचिव प्रमोद चौरसिया, बोकारो जिप उपाध्यक्ष बबीता देवी, धनबाद जिप उपाध्यक्ष सरिता देवी, सुभाष रवानी, धनबाद जिलाध्यक्ष मंटू महतो, बोकारो जिलाध्यक्ष सचिन महतो, गिरिडीह जिलध्यक्ष गुड्डु यादव आदि शामिल थे।
सभा को संबोधित करते हुए सुदेश महतो ने कहा कि झारखंड में वसूल नहीं, वसूली की सरकार चल रही है। इसे उखाड़ फेंकेंगे। उन्होंने कहा कि गुरुजी का बेटा झारखंड में मुख्यमंत्री बना तो जनता को कई उम्मीदें थीं, लेकिन उसने झारखंड के लुटेरो और माफिया से हाथ मिला लिया है और अपने ही लोगों का दमन कर रहा है। हेमंत सरकार झारखंडी भावना का नेतृत्व नहीं करती।
श्री महतो ने कहा कि झारखंड की हेमंत सरकार का चरित्र सामने आ चुका है। उनकी पुलिस और आपराधिक गंठजोड़ हो चुका है। एक गैंगस्टर प्रिंस खान विदेश में बैठकर शहर के पुलिस कप्तान को चुनौती देता है और गंभीर आर्थिक आरोप लगाता है और न तो पुलिस कोई जवाब देती है और न ही राज्य सरकार कोई कदम उठाती है। श्री महतो ने कहा कि यह गंभीर मामला है और इसकी जांच एनआईए से होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आजसू को राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन हल्के में लेने की गलती न करे। हम संघर्ष कर यहां तक पहुंचे हैं। आजसू ने लंबा संघर्ष कर अलग राज्य बनाया है।
श्री महतो ने कहा कि स्व विनोद बिहारी महतो, ए के राय और शिबू सोरेन ने अलग राज्य की लड़ाई को आगे बढ़ाया, उनका भी हम सम्मान करते हैं। लेकिन सच यह भी है कि झामुमो ने झारखंड आंदोलन की सौदेबाजी की, नहीं तो 1993 में राज्य बन जाता।
श्री महतो ने कहा कि झारखंडी जनता न्याय की भीख अपनी सरकार से मांग रही। उन्होंने कहा कि अब बड़े इंकलाब की तैयारी करनी पड़ेगी। शोषणविहीन झारखंड का निर्माण हमारा प्रण है। आज नवजवानों को पेडवर्कर बनाया जा रहा है। भाई को भाई से लड़ाने का काम किया जा रहा है। बीसीसीएल के माइनिंग से ज्यादा निजी माइनिंग पुलिस और राज्य के मुखिया के संरक्षण में चल रहा है। शासन और प्रशासन नहीं सुनेगा तो आजसू को सुनाने आता है। जिनकी जमीन गई, जो लोग विस्थापित हुए उनके साथ न्याय होना चाहिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित