रांची , अप्रैल 04 -- झारखंड में ओबीसी आरक्षण का विषय एक बार फिर चर्चा में है।

सुदेश महतो ने बतौर पंचायती राज मंत्री रहते हुए अपने कार्यकाल में दस हज़ार पदों पर पंचायत चुनाव में ओबीसी को आरक्षण दिया था।

आजसू के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता संजय मेहता ने बताया की पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो जी के प्रयासों से ही पंचायत चुनाव में बड़े स्तर पर ओबीसी को आरक्षण मिला था। हेमंत सरकार ने पंचायत चुनाव में 10 हजार पदों पर ओबीसी के आरक्षण के इस अधिकार को 2022 में साजिश के तहत एकमुश्त समाप्त कर दिया था। ओबीसी के सभी पदों को 2022 के पंचायत चुनाव में झारखंड की हेमंत सरकार ने सामान्य कर दिया था। जिसने बड़े आक्रोश को जन्म दिया।

हेमन्त सरकार के इस ओबीसी विरोधी फ़ैसले के ख़िलाफ़ 2022 में आजसू पार्टी सुप्रीम कोर्ट चली गयी थी। रिट संख्या 239/2022 के माध्यम से पार्टी के सांसद चन्द्र प्रकाश चौधरी सुप्रीम कोर्ट चले गए। इसी रिट के फैसले के आलोक में इस बार हाल में सम्पन्न हुए नगर निकाय चुनाव में ओबीसी को आरक्षण दिया गया।

श्री मेहता ने बताया की आजसू के प्रयास से पंचायत चुनाव में भी इसी फैसले के आलोक में ओबीसी को आरक्षण दिया जाएगा। 2027 के पंचायत चुनाव में ओबीसी को आरक्षण सरकार को देना ही होगा। ऐसा नहीं करने पर सरकार को अदालत की अवमानना की याचिका का सामना करना पड़ेगा।

श्री मेहता ने बताया की हेमंत सरकार ट्रिपल टेस्ट के बिना ही पंचायत और नगर निकाय चुनाव करवाना चाहती थी, ताकि ओबीसी को आरक्षण नहीं देना पड़े। इस पर आजसू सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी सुप्रीम कोर्ट गये जिसका बड़ा विधिक प्रभाव हुआ। कोर्ट के निर्देश के बाद नगर निकाय चुनाव से पूर्व सरकार ने ओबीसी के लिए ट्रिपल टेस्ट करवाया। हालांकि इसमें भी देरी के लिए ओबीसी आयोग के अध्यक्ष का पद लंबे समय तक खाली रखा गया था। आजसू लगातार इस गतिविधि पर नजर बनाये हुए थी जिसके बाद ओबीसी को आरक्षण देने के लिए सरकार को मजबूर होना पड़ा।

पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो के निर्देश पर सांसद चन्द्रप्रकाश चौधरी दायर इस रिट में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए 2022 में कहा था कि वर्तमान में चल रहे पंचायत चुनाव के अलावा भविष्य में जो भी पंचायत या नगर निकाय चुनाव झारखंड सरकार करवाएगी उसमें ट्रिपल टेस्ट के आधार पर ओबीसी को आरक्षण देना अनिवार्य होगा। ऐसे में झारखंड सरकार के लिए यह विधिक बाध्यता बन गयी और सरकार को नगर निकाय में ओबीसी को आरक्षण देना पड़ा। अब सरकार को पंचायत चुनाव में भी यह पालन करना होगा।

जब लगातार इस मामले में सरकार द्वारा ओबीसी को आरक्षण देने में देरी की जाने लगी। पुनः गिरिडीह सांसद ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर रिट संख्या 239/2022 के फैसले को प्रभावी तौर पर लागू करने को कहा। ऐसा नहीं करने पर उन्होंने अवमानना याचिका दायर करने की बात कही थी। जिसके बाद झारखंड नगर निकाय चुनाव के लिए ट्रिपल टेस्ट पूर्ण कराया गया। फिर आरक्षण की प्रक्रिया पूर्ण हुई।

श्री मेहता ने कहा की नगर निकाय चुनाव में ट्रिपल टेस्ट कराने में भी सरकार ने जल्दबाजी में उच्च मानकों का पालन नहीं किया। चूँकि पंचायत चुनाव में 4345 पंचायत, 264 प्रखंड और 24 जिलों में ओबीसी को आरक्षण दिया जाना है। इसलिए आयोग अभी से ओबीसी वन एवं टू का डाटा संग्रह का कार्य प्रारंभ करे। क्योंकि पंचायत चुनाव में अब सिर्फ एक साल का वक्त बचा है। ऐसे में आधिकारिक आरक्षण का रोस्टर जल्द जारी किया जाना चाहिए।

श्री मेहता ने कहा की आजसू पार्टी ओबीसी को अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। जेएमएम द्वारा लगातार ओबीसी के अधिकारों को कुचलने की साज़िश और कोशिश हुई। हम ओबीसी के अधिकारों को कुचलने नहीं देंगे। सड़क, सदन से न्यायालय तक हमने इसकी लड़ाई लड़ी है। आज झारखंड में कई ओबीसी के मेयर, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, डिप्टी मेयर, पार्षद बने हैं। यह सिर्फ आजसू के प्रयासों से संभव हुआ है। यदि आजसू न्यायालय जाकर नहीं लड़ती तो आज नगर निकाय चुनाव में ओबीसी को आरक्षण नहीं मिला होता। हम पंचायत चुनाव में भी ओबीसी को आरक्षण दिला कर रहेंगे।

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