आजमगढ़ , मई 27 -- उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ जिले की एक अदालत ने 19 वर्ष पुराने जानलेवा हमले के चर्चित मामले में बुधवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी चार आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया।

अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-दो दिनेश कुमार की अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य और ठोस सबूतों के अभाव में यह निर्णय दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार देवगांव थाना क्षेत्र के कहला सिकंदरपुर गांव में वर्ष 2007 में पुरानी रंजिश को लेकर यह घटना हुई थी। आरोप था कि 21 मई 2007 की शाम करीब साढ़े पांच बजे जयप्रकाश सिंह के उकसाने पर गांव के ही सुनील सिंह, हरिशंकर सिंह और राजबहादुर सिंह ने कामता सिंह पर कट्टे से फायरिंग की थी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

मामले की जांच के बाद पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। अभियोजन पक्ष ने आरोप साबित करने के लिए अदालत में पांच गवाह पेश किए और उनके बयान दर्ज कराए। वहीं बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रदीप यति और रविन्द्रनाथ त्रिपाठी ने अदालत में पैरवी करते हुए दलील दी कि रंजिश के कारण आरोपियों को झूठा फंसाया गया है और उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है। बचाव पक्ष ने अपने समर्थन में दो महत्वपूर्ण गवाह भी पेश किए।

दोनों पक्षों की दलीलों और गवाहों के बयानों पर विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसके आधार पर अदालत ने सुनील सिंह, हरिशंकर सिंह, राजबहादुर सिंह और जयप्रकाश सिंह को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।

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