आजमगढ़ , जुलाई 10 -- उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ जिले की जिला एवं सत्र न्यायालय ने बहुचर्चित श्रीराम हत्याकांड में तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सश्रम आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने जुर्माने की 80 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी को देने का आदेश दिया, वहीं विवेचना में लापरवाही पाए जाने पर विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक को निर्देश भी दिए।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय की अदालत ने अहरौला थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव में हुए श्रीराम हत्याकांड में सुनवाई पूरी होने के बाद शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी शुभम चौहान, रामसेवक चौहान और सुरेंद्र को हत्या का दोषी करार देते हुए सश्रम आजीवन कारावास तथा प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। साथ ही जुर्माने की राशि का 80 प्रतिशत हिस्सा मृतक की पत्नी को देने का आदेश दिया। वहीं, पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर आरोपी सतिराम को दोषमुक्त कर दिया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी,के अनुसार अभियोजन पक्ष के आलमपुर निवासी विनोद चौहान और गांव के रामसेवक चौहान के बीच पुरानी रंजिश चल रही थी। इसी विवाद को लेकर विनोद चौहान की पत्नी इसरावती ने 22 सितंबर 2024 को मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि इसी मुकदमे से नाराज होकर 29 सितंबर 2024 की रात शुभम चौहान, रामसेवक चौहान, सुरेंद्र सहित अन्य लोगों ने विनोद चौहान के पिता श्रीराम की गोली मारकर हत्या कर दी।
घटना के बाद विनोद चौहान ने शुभम चौहान समेत 10 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने चार आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दीपक कुमार मिश्रा तथा अधिवक्ता जितेंद्र यादव ने कुल नौ गवाहों के बयान न्यायालय में प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
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