आजमगढ़ , जुलाई 16 -- उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ साइबर क्राइम थाना पुलिस ने गुरुवार को देशभर में फैले एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि एक कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल ऑनलाइन ट्रेडिंग और "डिजिटल अरेस्ट" जैसे साइबर अपराधों से ठगी की रकम के लेन-देन के लिए किया जा रहा था। इस खाते से जुड़े 20 राज्यों की 73 शिकायतों में कुल 83.94 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देश पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से पांच मोबाइल फोन, दो एटीएम कार्ड और 3,860 रुपये नकद बरामद किए हैं।

अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि , प्रतिबिंब पोर्टल पर प्राप्त सूचना के आधार पर ऐक्सिस बैंक के एक संदिग्ध खाते की जांच की गई। तकनीकी और तथ्यात्मक विश्लेषण में पता चला कि इस खाते के खिलाफ देश के 20 राज्यों से 73 एनसीआरपी शिकायतें दर्ज थीं। इन शिकायतों में ऑनलाइन ट्रेडिंग और "डिजिटल अरेस्ट" के नाम पर लोगों से साइबर ठगी की गई थी।

जांच में सामने आया कि संबंधित बैंक खाता निशा मैनपॉवर सर्विस प्रा लि के नाम पर संचालित था। इस मामले में आनंद रॉव , सुनील निकले कंपनी के डायरेक्टर थे । इनसे पूछताछ के दौरान प्रशान्त सिंह उर्फ लकी को थाना दीदारगंज जनपद आजमगढ़ का नाम प्रकाश मे आया । पूछताछ के बाद तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि प्रशांत सिंह ने कमीशन के बदले कंपनी का बैंक खाता साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था। इसके बाद खाते का विवरण उसके सहयोगी मोनू सिंह को दिया गया और उसी खाते में साइबर अपराध से प्राप्त करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया। पहले से तय कमीशन के आधार पर सभी आरोपियों को रकम का हिस्सा मिलता था।

पुलिस के अनुसार, 14 नवंबर 2025 से 18 नवंबर 2025 के बीच मात्र चार दिनों में इस खाते से Rs.4.85 करोड़ से अधिक का लेन-देन हुआ। वहीं, दर्ज 73 साइबर शिकायतों के विश्लेषण में Rs.83.94 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी का संबंध इसी खाते से पाया गया।

इस मामले में थाना साइबर क्राइम में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 319(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की विवेचना की जा रही है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों और पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी है।

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