आजमगढ़ , मई 30 -- उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में जमीन के कारोबार में साझेदारी का झांसा देकर तथा फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर 1.24 करोड़ रुपये की ठगी करने के मामले में अदालत ने आरोपी को सात वर्ष के कठोर कारावास और 91 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय संख्या-11 के न्यायाधीश अंकित वर्मा ने शनिवार को मामले की सुनवाई के बाद आरोपी सुभाष चौबे को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास तथा 91 लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया। अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की पूरी राशि पीड़ित को प्रतिकर (मुआवजा) के रूप में प्रदान की जाएगी।

अभियोजन अधिकारी अरविंद कुमार राठी ने बताया कि फूलपुर थाना क्षेत्र के टेउंगा निवासी इमरान अहमद की वर्ष 2008 में जहानागंज थाना क्षेत्र के गंभीरवन निवासी सुभाष चौबे से मुलाकात हुई थी। आरोपी ने इमरान को भूमि क्रय-विक्रय के व्यवसाय में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का प्रस्ताव दिया और विश्वास दिलाने के लिए लखनऊ स्थित एक ट्रस्ट की कथित पावर ऑफ अटॉर्नी के दस्तावेज भी दिखाए।

आरोपी के झांसे में आकर इमरान अहमद ने दो फरवरी 2008 को उसके साथ एक लिखित अनुबंध किया और विभिन्न किश्तों में कुल 1.24 करोड़ रुपये दे दिए। काफी समय बीत जाने के बाद भी कोई भूमि क्रय नहीं की गई। धनराशि वापस मांगने पर आरोपी ने कुछ चेक दिए, जो बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर अनादृत (बाउंस) हो गए।

इसके बाद पीड़ित ने सात दिसंबर 2010 को फूलपुर थाने में आरोपी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस जांच के बाद आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाहों को प्रस्तुत किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए उपरोक्त सजा सुनाई।

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