आजमगढ़ , अक्टूबर 26 -- उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ जिले की दीवानी न्यायालय की अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-एक कमलापति की अदालत ने रानी की सराय थाना क्षेत्र के रूदरी गांव में दशहरे के दिन हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड में करीब 19 साल बाद अहम फैसला सुनाया है। पारसनाथ सिंह और तालुकदार सिंह की हत्या के मामले में रानी की सराय के ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह समेत आठ आरोपियों को दोषी करार दिया गया है। वहीं, इसी घटना से जुड़े क्रॉस केस में भी छह आरोपियों को दोषी ठहराया गया है। दोनों मामलों में सजा कितनी होगी, इसका फैसला 29 अक्टूबर को सुनाया जाएगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के दिन सुबह करीब नौ बजे रूदरी गांव निवासी रामजन्म सिंह अपने दरवाजे पर बैठे थे। इसी दौरान विपिन सिंह समेत नौ लोग हथियारों से लैस होकर वहां पहुंचे। आरोप है कि विपिन सिंह ने तालुकदार सिंह को गोली मार दी, जबकि राजेश सिंह ने पारसनाथ सिंह को गोली मार दी। इस दौरान अन्य लोगों ने रामजप सिंह, उनके भतीजे अंकित सिंह और आशीष के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की। गोली लगने से पारसनाथ सिंह और तालुकदार सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी।

मामले की विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता गोपाल पांडे तथा अधिवक्ता विंध्यवासिनी प्रसाद सिंह की तरफ से कुल सत्रह गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया गया । दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आठ आरोपियों को दोषी करार दिया। मामले के एक आरोपी राधेश्याम सिंह की मृत्यु हो चुकी है।

इसी घटना को लेकर विपिन सिंह की ओर से भी कातिलाना हमले की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि रामदरस, आशीष सिंह, शक्ति सिंह, दीपक सिंह और रामजन्म सिंह समेत अन्य लोगों ने बलवंत और अरविंद के साथ मारपीट की तथा फायरिंग की, जिसमें विपिन सिंह के पैर में गोली लगी थी।

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