पटना , फरवरी 27 -- राज्य में आगामी ग्रीष्म ऋतु के दौरान संभावित पेयजल संकट से प्रभावी रूप से निपटने के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने व्यापक तैयारियाँ शुरू कर दी है।
कई जिलों में भूजल स्तर में संभावित गिरावट को ध्यान में रखते हुए विभाग ने अकार्यरत चापाकलों की मरम्मती, जल संकटग्रस्त पंचायतों में वैकल्पिक जलापूर्ति, जल गुणवत्ता निगरानी तथा 'हर घर नल का जल' योजनाओं की सतत क्रियाशीलता सुनिश्चित करने के लिये अवश्यक दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं।
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के मंत्री संजय कुमार सिंह ने कहा कि आगामी गर्मी के मौसम में राज्य के किसी भी गाँव, टोले या बसावट में पेयजल की कमी न हो, यह विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होने कहा कि सभी अधिकारियों को अकार्यरत चापाकलों की नियमित मरम्मती एवं संपोषण, जल संकटग्रस्त पंचायतों में टैंकरों के माध्यम से वैकल्पिक जलापूर्ति, 'हर घर नल का जल' योजनाओं की निरंतर क्रियाशीलता तथा जल गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं के समयबद्ध समाधान का स्पष्ट निर्देश दिया गया है।
मंत्री ने बताया कि पंचायत को एक इकाई मानते हुए सभी अकार्यरत चापाकलों का सर्वेक्षण कर उनकी मरम्मती सुनिश्चित की जाएगी। अनुसूचित जाति/जनजाति बसावटों, महादलित टोलों, विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों तथा महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर स्थित चापाकलों की मरम्मती को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मरम्मती के दौरान यदि कोई चापाकल मरम्मती योग्य नहीं पाया जाता है, तो उसे तत्काल स्थल से हटाया जाएगा।
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