नयी दिल्ली , अक्टूबर 28 -- इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी (आईसीजीईबी) ने मंगलवार को यहाँ विशेष गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया जिसमें उभरती संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित और डेटा-आधारित वैज्ञानिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कार्यक्रम में भारत और इटली के प्रमुख वैज्ञानिकों, शोध प्रशासकों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में जीनोमिक साक्ष्य की भूमिका पर विचार-विमर्श करना था। बैठक में जोर दिया गया कि उभरती संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित और डेटा-आधारित वैज्ञानिक सहयोग आवश्यक है। प्रतिभागियों ने कहा कि कोविड-19 महामारी के अनुभवों ने यह सिखाया है कि सभी देशों को एकजुट होकर जीनोमिक निगरानी, अनुसंधान के व्यावहारिक उपयोग और स्वास्थ्य प्रणाली की तत्परता को बढ़ाना चाहिए।
भारत में इटली दूतावास के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत-इटली सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। यहाँ इटली दूतावास में वैज्ञानिक अताशे डॉ. सर्जियो लेड्डा ने कहा कि प्रयोगशालाओं में होने वाले वैज्ञानिक अनुसंधान को आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना बेहद जरूरी है। इससे न केवल लोगों को सही जानकारी मिलती है बल्कि गलतफहमियों और फेक नैरेटिव्स को दूर करने में भी मदद मिलती है।
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