बैतूल , अक्टूबर 23 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में जल जीवन मिशन के तहत ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित 831 ग्रामीण नल-जल प्रदाय योजनाओं की निगरानी अब इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित स्मार्ट ऑटोमेशन प्रणाली से करने की पहल शुरू की गई है। इससे जलापूर्ति व्यवस्था की ऑनलाइन निगरानी के साथ तकनीकी खराबियों का समय पर पता लगाने और उन्हें दूर करने में मदद मिलेगी।

कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने विकासखंड बैतूल के ग्राम बांसपानी पहुंचकर नल-जल योजना में स्थापित आईओटी उपकरणों और स्मार्ट ऑटोमेशन प्रणाली का निरीक्षण किया। उन्होंने मोटर-पंप के संचालन, विद्युत वोल्टेज, करंट और 50 हजार लीटर क्षमता वाली ओवरहेड टंकी के जलस्तर की ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था का जायजा लिया। इस योजना से वर्तमान में ग्राम बांसपानी के 303 परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, नई प्रणाली के माध्यम से पंप के चालू-बंद होने, पंपिंग अवधि और टंकी में जलस्तर सहित तकनीकी आंकड़े सिम आधारित संचार प्रणाली से सर्वर तक पहुंचेंगे। इनकी निगरानी केंद्रीकृत वेब डैशबोर्ड के माध्यम से जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी कर सकेंगे। तकनीकी खराबी, कम वोल्टेज या ड्राई-रन की स्थिति में पंप स्वतः सुरक्षित रूप से बंद हो जाएंगे। अधिकृत अधिकारी और ऑपरेटर मोबाइल ऐप के जरिए भी पंप का संचालन कर सकेंगे।

कलेक्टर ने जिले की शेष हस्तांतरित नल-जल योजनाओं में भी चरणबद्ध तरीके से आईओटी आधारित नियंत्रक स्थापित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ग्राम पंचायत खडला के नया गांव में सिरपुर पैटर्न के तहत चल रहे विकास कार्यों का अवलोकन किया और ग्राम पंचायत सावंगा में मक्के की फसल का जायजा लेकर कृषि गतिविधियों की जानकारी भी ली। इस अवसर पर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्रियों सहित अन्य अधिकारी और ग्रामीण उपस्थित रहे।

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