कोलकाता , जून 23 -- पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेताओं ने मंगलवार को कोलकाता नगर निगम के उस फ़ैसले की आलोचना की, जिसमें दक्षिण कोलकाता में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड कर दिया गया है। नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह कदम ऐतिहासिक गलतफहमी पर आधारित है और इससे इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा गया है।

इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि वह मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को पत्र लिखकर सड़क का पुराना नाम बहाल करने का आग्रह करेंगे। विधानसभा के बाहर श्री सिद्दीकी ने कहा कि नगर निकाय ने इस रास्ते का नाम अविभाजित बंगाल के पूर्व प्रधानमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी के नाम से जोड़कर एक गंभीर गलती की है।

श्री सिद्दीकी ने कहा, इस सड़क का नाम डॉ. सर हसन सुहरावर्दी के नाम पर रखा गया था जो एक जाने-माने डॉक्टर, शिक्षाविद एवं कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति थे। उन्होंने ईस्ट इंडियन रेलवे के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रूप में भी काम किया और बंगाल विधान परिषद के सदस्य भी थे। हुसैन शहीद सुहरावर्दी उनके भतीजे थे। वे दोनों एक ही व्यक्ति नहीं थे।

उन्होंने कहा कि भले ही 1946 के कलकत्ता दंगों के दौरान हुसैन शहीद सुहरावर्दी की भूमिका ऐतिहासिक बहस का विषय रही हो लेकिन इसे शहर की किसी सड़क से डॉ. हसन सुहरावर्दी का नाम हटाने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।

आईएसएफ विधायक ने कहा, "मैं इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री को पत्र लिख रहा हूं और ज़रूरत पड़ने पर उनसे मुलाक़ात की कोशिश भी करूंगा।" इस मांग का समर्थन करते हुए माकपा विधायक मुस्तफ़िज़ुर रहमान ने आरोप लगाया कि नाम बदलने का यह कदम इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश है।

"History is being distorted. This is harmful for Bengal and Bengalis. The Chief Minister shouldउन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें नए नाम से कोई आपत्ति नहीं है लेकिन मौजूदा नाम को हटाने के पीछे के कारण से आपत्ति है। केएमसी ने हाल ही में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड कर दिया है।

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