रांची , अगस्त 21 -- झारखंड के भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), रांची परिसर में अत्याधुनिक डिस्ड्रोमीटर उपकरण की स्थापना की गई।
यह बिहार-झारखंड क्षेत्र में अपनी तरह का पहला उन्नत उपकरण है, जो वर्षा की सूक्ष्म भौतिक विशेषताओं के अध्ययन तथा उच्च-रिज़ॉल्यूशन वर्षा मापन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
डिस्ड्रोमीटर एक अत्याधुनिक वर्षामापन उपकरण है, जो वर्षा की बूंदों के आकार, संख्या और उनकी गति का मापन करता है। इससे वर्षा की बूंदों के आकार का वितरण, वर्षा की तीव्रता और संचयी वर्षा जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों पर अध्ययन किया जा सकता है। इससे वर्षा की कुल मात्रा के साथ-साथ उसकी सूक्ष्म संरचना और प्रकृति को समझने में सहायता मिलती है।
इस अत्याधुनिक उपकरण की स्थापना भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे के वैज्ञानिक डॉ. अंबुज कुमार झा (वैज्ञानिक) और रोहित पाटिल (परियोजना वैज्ञानिक) द्वारा की गई, जिसमें आईएमडी रांची का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। इस अवसर पर आईएमडी रांची के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. बाबूराज,वरिष्ठ वैज्ञानिक अभिषेक आनंद तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
यह स्थापना आईआईटीएम, पुणे की एआऱटी परियोजना के अंतर्गत भारत में विकसित किए जा रहे डिस्ड्रोमीटर नेटवर्क का हिस्सा है, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार के "मिशन मौसम" के तहत संचालित एक महत्वपूर्ण पहल है। इस नेटवर्क का उद्देश्य देश के विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में वर्षा की सूक्ष्म संरचना एवं सूक्ष्मभौतिकीय विशेषताओं का अध्ययन करना है, जिससे मौसम पूर्वानुमान एवं वर्षा विश्लेषण को और अधिक प्रभावी बनाने में सहयोग मिलेगा।
रांची एवं झारखंड क्षेत्र में बंगाल की खाड़ी से उत्पन्न निम्न दबाव प्रणालियों तथा मानसूनी प्रणालियों के प्रभाव से व्यापक एवं कभी-कभी तीव्र वर्षा होती है। साथ ही, गरज-चमक के साथ होने वाली संवहनीय वर्षा भी क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इन विभिन्न वर्षण प्रणालियों के दौरान वर्षा की संरचना में होने वाले बदलावों का अध्ययन डिस्ड्रोमीटर के माध्यम से किया जा सकेगा।
इस अवसर पर आईआईटीएम पुणे के डॉ. अंबुज कुमार झा ने कहा कि डिस्ड्रोमीटर की स्थापना से रांची एवं आसपास के क्षेत्र में वर्षा अवलोकन क्षमताएँ और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा क्षेत्रीय मौसम अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी। विशेष रूप से, इन आँकड़ों से रडार आधारित वर्षा आकलन एवं अवलोकन तथा मौसम पूर्वानुमान मॉडलों के मूल्यांकन और सुधार में भी सहायता मिलेगी।
यह पहल भारत में आधुनिक एवं उच्च-रिज़ॉल्यूशन वर्षा अवलोकन नेटवर्क के विस्तार तथा वर्षा की सूक्ष्म भौतिक प्रक्रियाओं की बेहतर समझ विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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