जयपुर , मार्च 08 -- राजस्थान की राजधानी जयपुर में तीन दिवसीय आईएमएसओएस- 2026 बीएमकॉन कॉन्फ्रेंस रविवार को सम्पन्न हो गई जिसमें थ्री डी प्रिंटिंग एवं रोबोटिक्स से बोन ट्यूमर सर्जरी पर चर्चा हुई।

भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमसीएचआरसी) एवं इंडियन मस्क्यूलोस्केलेटल ऑन्कोलॉजी सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भाग लिया और इसके अंतिम दिन हड्डियों के कैंसर से जुड़े आधुनिक उपचार, नई तकनीकों और चिकित्सकीय अनुभवों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन मैलिग्नेंट बोन ट्यूमर- अतीत, वर्तमान और भविष्य विषय पर विशेषज्ञों ने विस्तृत विचार साझा किए। इस सत्र में बोन कैंसर के उपचार में पिछले वर्षों में हुए बदलाव, वर्तमान में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इसके साथ ही बोन सारकोमा के सर्जिकल मैनेजमेंट में थ्री-डी प्रिंटिंग, रोबोटिक्स और नेविगेशन तकनीक के उपयोग पर भी विशेषज्ञों ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से सर्जरी अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी बन रही है, जिससे मरीजों के उपचार परिणाम बेहतर हो रहे हैं।

कॉन्फ्रेंस में रीजनल एनेस्थीसिया वर्कशॉप भी आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के माध्यम से नई तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यशाला में एनेस्थीसिया से जुड़ी आधुनिक विधियों और उनके सुरक्षित उपयोग के बारे में विस्तार से बताया गया, जिससे चिकित्सकों को अपने क्लिनिकल अभ्यास में इन तकनीकों को अपनाने में मदद मिल सके।

समापन सत्र में आयोजित अनुभव साझा सत्र में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान डॉ. मनीष अग्रवाल ने अच्छी क्लिनिकल प्रैक्टिस की स्थापना पर अपने विचार रखे और बताया कि मरीजों के बेहतर उपचार के लिए चिकित्सकों को लगातार सीखने और नई तकनीकों को अपनाने की जरुरत है वहीं डॉ. अजय पुरी ने अकादमिक उत्कृष्टता तक कैसे पहुंचे, विषय पर अपने अनुभव साझा किए और चिकित्सा क्षेत्र में शोध एवं शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।

कॉन्फ्रेंस के आयोजन सचिव डॉ. अरविन्द ठाकुरिया ने बताया कि तीन दिनों तक चली इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में 14 वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 44 आमंत्रित विशेषज्ञ वक्ताओं ने भाग लिया। इसके अलावा 150 से अधिक फैकल्टी और 400 से अधिक प्रतिभागियों ने कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेते हुए अपने अनुभव साझा किए और मस्क्यूलोस्केलेटल कैंसर के नवीनतम उपचार तरीकों पर चर्चा की।

कॉन्फ्रेंस के एक सत्र में डॉ. अजय पुरी ने बताया कि कैंसर की पहचान के लिए की जाने वाली बायोप्सी में पारंपरिक ओपन बायोप्सी की तुलना में नीडल बायोप्सी को अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तकनीक के उपयोग से संक्रमण का जोखिम कम होता है और मरीज के लिए प्रक्रिया अधिक सुरक्षित होती है वहीं डॉ. मनीष अग्रवाल ने भारतीय स्तर पर विकसित किए जा रहे इंडियन इम्प्लांट्स के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ये इम्प्लांट्स मरीजों के लिए किफायती और प्रभावी विकल्प साबित हो रहे हैं।

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