भोपाल , जुलाई 10 -- मध्यप्रदेश के भोपाल संभाग के आयुक्त कर्मवीर शर्मा ने शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) और मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में कमी लाने के लिए महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग को समन्वित रूप से जमीनी स्तर पर अभियान चलाकर परिणामोन्मुखी कार्य करने के निर्देश दिए।
श्री शर्मा ने आज यहां महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक में कहा कि दोनों विभाग आपसी समन्वय से कार्य करते हुए शिशु एवं मातृ मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए प्रभावी रणनीति अपनाएं। उन्होंने 14 जुलाई से शुरू होने वाले 'दस्तक अभियान' के सफल संचालन के भी निर्देश दिए।
उन्होंने जिला स्तर पर सीडीपीओ-बीएमओ तथा डीपीओ-सीएमएचओ की संयुक्त बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने तथा आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं के पंजीयन और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों में विसंगतियों को दूर कर संयुक्त निगरानी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए।
संभागायुक्त ने कहा कि सभी गर्भवती महिलाओं का प्रारंभिक चरण में शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित किया जाए तथा उनकी चारों एएनसी जांच समय पर पूरी कराई जाएं। उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं और गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं की विशेष निगरानी एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए, ताकि मातृ मृत्यु के मामलों में कमी लाई जा सके।
उन्होंने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, नवविवाहित महिलाओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी तथा शून्य से पांच वर्ष तक के सभी बच्चों का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। इसके लिए यू-विन पोर्टल के माध्यम से जिला स्तर पर नियमित डेटा साझा करने पर बल दिया।
श्री शर्मा ने कुपोषण उन्मूलन के लिए गंभीर एवं मध्यम कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़ने, नियमित गृह-भेंट करने तथा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमों द्वारा वर्ष में दो बार स्वास्थ्य परीक्षण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर), गैर-सरकारी संगठनों, रेडक्रॉस और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों की भागीदारी से पोषण अभियान को जन-आंदोलन बनाने का भी आह्वान किया।
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