नयी दिल्ली , जुलाई 21 -- केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत निवारण, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत में अगली पीढ़ी के शासन सुधार साक्ष्य-आधारित निर्णय, पेशेवर क्षमता निर्माण और मजबूत वित्तीय प्रबंधन पर आधारित होंगे।

डॉ. सिंह आज भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) और भारतीय चार्टर्ड लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षर समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नगरपालिका लेखांकन अब केवल वित्तीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-आधारित और नागरिक-केंद्रित शहरी शासन की आधारशिला बन चुका है।

उन्होंने कहा कि यह साझेदारी नगर निकायों की क्षमता बढ़ाने और नगरपालिका लेखांकन एवं वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आईआईपीए की शासन एवं लोक प्रशासन में विशेषज्ञता और आईसीएआई की लेखांकन एवं सार्वजनिक वित्त प्रबंधन संबंधी दक्षता मिलकर शहरी स्थानीय निकायों में संस्थागत सुधारों को नयी गति देंगी। उनके अनुसार, प्रौद्योगिकी, विश्वसनीय आंकड़े और पेशेवर प्रणालियां भविष्य के शहरी शासन की दिशा तय करेंगी।

एमओयू के तहत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से अनुसंधान, नीति अध्ययन, प्रशिक्षण, कार्यशालाओं, सेमिनारों, वेबिनार और तकनीकी सहायता कार्यक्रमों का संचालन करेंगे। इसके अलावा नगरपालिका अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किये जायेंगे तथा वित्तीय जवाबदेही, पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा देने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान किया जाएगा। यह समझौता प्रारंभिक रूप से तीन वर्षों के लिए लागू रहेगा।

केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि यह साझेदारी शहरी स्थानीय निकायों को आधुनिक वित्तीय प्रणालियों, बेहतर संस्थागत क्षमता और वैश्विक मानकों के अनुरूप लेखांकन व्यवस्था से सशक्त बनायेगी। उन्होंने कहा कि इससे नगर प्रशासन अधिक प्रभावी होगा, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा और नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

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