वाराणसी , अक्टूबर 09 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) और नेशनल हाईवेज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने राजमार्ग अवसंरचना के विकास, तकनीकी नवाचार और संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

आठ अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित एनएचआईडीसीएल मुख्यालय में हुए इस समझौते का उद्देश्य विशेष रूप से पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क निर्माण से जुड़ी चुनौतियों के तकनीकी समाधान विकसित करना है। समझौते के तहत दोनों संस्थान उन्नत राजमार्ग इंजीनियरिंग, ढलानों के स्थिरीकरण, टिकाऊ सड़क निर्माण तकनीकों और सड़क नेटवर्क की वास्तविक समय में निगरानी जैसे क्षेत्रों में संयुक्त रूप से काम करेंगे। इसके अलावा, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में राजमार्ग निर्माण से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए संयुक्त शोध परियोजनाएं भी संचालित की जाएंगी।

इस साझेदारी के तहत आईआईटी (बीएचयू) सड़क निर्माण सामग्री के परीक्षण, संरचनात्मक सुरक्षा के आकलन, तकनीकी परामर्श और एनएचआईडीसीएल की परियोजनाओं के लिए विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों और अभियंताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और इंटर्नशिप के अवसर भी विकसित किए जाएंगे।

समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर एनएचआईडीसीएल के प्रबंध निदेशक डॉ. किशन कुमार (आईएएस), निदेशक (तकनीकी) अमरेंद्र कुमार, आईआईटी (बीएचयू) के शोध एवं विकास अधिष्ठाता प्रो. राजेश कुमार तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के चेयर प्रोफेसर प्रो. अंकित गुप्ता उपस्थित रहे।

डॉ. किशन कुमार ने शैक्षणिक अनुसंधान और वास्तविक निर्माण कार्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रो. राजेश कुमार ने कहा कि इस सहयोग से संस्थान में विकसित शोध को सड़क परिवहन क्षेत्र की व्यावहारिक जरूरतों से जोड़ने में मदद मिलेगी। वहीं, प्रो. अंकित गुप्ता ने इसे सड़क निर्माण तकनीक में नवाचार और राजमार्ग सुरक्षा मानकों में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। दोनों संस्थानों को उम्मीद है कि यह साझेदारी देश में सुरक्षित, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल राजमार्ग नेटवर्क के विकास में योगदान देगी।

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