चेन्नई , मार्च 25 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मद्रास (आईआईटी-मद्रास) ने आध्यात्मिकता, ध्यान, विज्ञान और समाज के अंतर्संबंधों का पता लगाने के लिए 'सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च ऑन स्पिरिचुअलिटी, साइंस एंड सोसाइटी' की स्थापना की है।
यह केंद्र मानव कल्याण और चेतना पर वैश्विक अनुसंधान में योगदान देगा और विज्ञान, मानविकी, चिकित्सा और वास्तुकला को जोड़ने वाले अंतःविषय अनुसंधान को बढ़ावा देगा। इसके अलावा, यह केंद्र ध्यान और आध्यात्मिकता के वैज्ञानिक और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन करेगा और शैक्षिक कार्यक्रम एवं सार्वजनिक जुड़ाव पहल विकसित करेगा।
आईआईटी-मद्रास के पूर्व छात्र और प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु संत राजिंदर सिंह जी महाराज ने आईआईटी-मद्रास परिसर में इस केंद्र को शुरू करने के लिए पांच करोड़ रुपये का योगदान दिया है।
श्री सिंह ने 1967 में आईआईटी-मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री प्राप्त की थी। वह 'साइंस ऑफ स्पिरिचुअलिटी' (एसओएस) के आध्यात्मिक प्रमुख हैं, जिसे भारत में सावन कृपाल रुहानी मिशन के रूप में जाना जाता है। यह एक वैश्विक आध्यात्मिक संगठन है जिसके 50 देशों में 3,400 से अधिक केंद्र हैं।
आईआईटी-मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी ने कहा कि छात्रों का कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य हमेशा प्राथमिकता रही है। ध्यान और आध्यात्मिक रूप से आधारित जीवन शैली छात्र के मन, शरीर और आत्मा के समग्र विकास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा, "हम अपने सम्मानित पूर्व छात्रों में से एक, संत राजिंदर सिंह जी महाराज के साथ साझेदारी करके सम्मानित महसूस कर रहे हैं, जिनके उदार योगदान ने आईआईटी मद्रास को यह महत्वपूर्ण कदम उठाने में सक्षम बनाया है।"महाराज ने कहा, "ध्यान व्यक्तियों को अपने वास्तविक स्वरूप को समझने, आंतरिक शांति का अनुभव करने और दूसरों के साथ अपने संबंधों में गहरे सद्भाव को बढ़ावा देने में मदद करता है।"केंद्र द्वारा कवर किए जाने वाले प्रमुख अनुसंधान विषयों में ध्यान और मानव स्वास्थ्य, आध्यात्मिक अनुभवों के शारीरिक निर्धारक, वास्तुकला और आध्यात्मिक स्थान, चिकित्सा और आध्यात्मिकता तथा अंतःविषय आध्यात्मिक अनुसंधान शामिल हैं।
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