चेन्नई , मई 25 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी-मद्रास) ने महासागर इंजीनियरिंग अनुसंधान के लिए एक उन्नत समुद्री अनुसंधान वाटर टनल सुविधा शुरू की है।
इसका निर्माण रक्षा मंत्रालय के अधीन एक नवरत्न रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) के सीएसआर (सीएसआर) फंड से किया गया है जिसके इसके लिए 4.5 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया गया है।
चेन्नई के पास थायूर में आईआईटी मद्रास के सैटेलाइट परिसर 'डिस्कवरी' में इस अत्याधुनिक 'सर्कुलेटिंग वाटर टनल' सुविधा का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी कामकोटी और आईआईटी मद्रास के डीन (एलुमनाई और कॉर्पोरेट रिलेशंस) प्रो. अश्विन महालिंगम मौजूद थे। साथ ही एमडीएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कैप्टन (सेवानिवृत्त) जगमोहन भी उपस्थित थे।
आईआईटी-मद्रास ने सोमवार को बताया कि 'सर्कुलेटिंग वाटर टनल सुविधा' हाइड्रोडायनामिक परीक्षण की एक उन्नत सुविधा है। यह सुविधा देश के समुद्री अनुसंधान, जहाजों के डिजाइन और महासागर इंजीनियरिंग की क्षमताओं को मजबूत करेगी। इससे समुद्री क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को भी बढ़ावा मिलेगा। नवनिर्मित हाइब्रिड विंड और सर्कुलेटिंग वाटर टनल सुविधा अब पूरी तरह से शुरू हो गयी है। यह जहाजों के मॉडल, प्रोपेलर और ब्लफ बॉडीज से जुड़ी उन्नत हाइड्रोडायनामिक जांच के लिए एक स्थिर और समान प्रवाह वाला परीक्षण क्षेत्र प्रदान करेगी। उम्मीद है कि यह सुविधा आईआईटी-मद्रास के महासागर इंजीनियरिंग विभाग में अनुसंधान और शिक्षण गतिविधियों को काफी बढ़ावा देगी।
इस मौके पर आईआईटी मद्रास के डीन प्रोफेसर अश्विन महालिंगम ने कहा, "मझगांव डॉक के साथ हमारी साझेदारी महासागर इंजीनियरिंग और इससे जुड़े विषयों में अनुसंधान और तकनीकी विकास को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह सुविधा जहाजों के मॉडल, प्रोपेलर, ब्लफ बॉडीज, समुद्री वाहनों, अपतटीय प्रणालियों और पानी के भीतर की संरचनाओं से जुड़े हाइड्रोडायनामिक्स में उन्नत प्रयोगात्मक अध्ययनों को सक्षम बनायेगी। इसके साथ ही यह इस क्षेत्र में काम करने वाले छात्रों, संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण और अनुसंधान के बेहतर अवसर भी पैदा करेगी। हम इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में अनुसंधान क्षमताओं और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी मद्रास के साथ साझेदारी करने के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के आभारी हैं।"इस सुविधा से बड़े और असरदार नतीजों की उम्मीद जताते हुए एमडीएल अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कैप्टन जगमोहन ने कहा, "एमडीएल में हमारा मानना है कि भारत की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अनुसंधान, नवाचार और शैक्षणिक साझेदारियों में लगातार निवेश की जरूरत है। हमें इस उन्नत सर्कुलेटिंग वाटर टनल सुविधा को स्थापित करने के लिए आईआईटी मद्रास के साथ साझेदारी कर बहुत खुशी हो रही है। यह सुविधा महासागर इंजीनियरिंग और नौसैनिक प्रौद्योगिकियों में अत्याधुनिक अनुसंधान को सक्षम बनायेगी। साथ ही यह भविष्य की प्रतिभाओं को भी निखारेगी। समुद्री क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं के विकास को तेज करने और 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए इस तरह के सहयोग बेहद महत्वपूर्ण हैं।"यह सुविधा समुद्री वाहनों, अपतटीय प्रणालियों, पानी के भीतर की संरचनाओं और द्रव गतिकी से जुड़े प्रयोगात्मक अध्ययनों में मदद करेगी। इसके अलावा यह महासागर इंजीनियरिंग और इससे जुड़े विषयों में काम करने वाले छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए उन्नत प्रशिक्षण के अवसर भी उपलब्ध करायेगी।
ईआईटी-मद्रास और एमडीएल उन्नत समुद्री और नौसैनिक प्रौद्योगिकियों में भविष्य के सहयोग की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं। प्रस्तावित पहलों में 'हाइड्रा सेंटर' शामिल है, जो 500 मीटर लंबे टोइंग टैंक वाली एक बड़े पैमाने की हाइड्रोडायनामिक परीक्षण सुविधा होगी। इसके साथ ही नौसैनिक पनडुब्बियों और छोटे जहाजों के लिए स्वदेशी रूप से विकसित उच्च दक्षता वाली मल्टीस्टेज थर्मोइलेक्ट्रिक सब-जीरो रेफ्रिजरेशन प्रणालियों पर अनुसंधान भी इस पहल का हिस्सा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित