रायपुर , जुलाई 29 -- छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए छत्तीसगढ़ से एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहल सामने आई है। आईआईटी भिलाई और रूंगटा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मिलकर एआई आधारित एक ऐसा स्मार्ट प्राणाली विकसित किया है, जो बैंकिंग लेनदेन के दौरान ही संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर संबंधित बैंक को तत्काल अलर्ट भेज सकेगा।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस तकनीक की मदद से बैंक ग्राहक से तुरंत संपर्क कर संदिग्ध ट्रांजेक्शन को रोक सकेंगे या खाते को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर जांच प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे।
इस एआई आधारित तकनीक को आईआईटी भिलाई के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गगनराज गुप्ता और रूंगटा विश्वविद्यालय की डीन (स्कूल ऑफ रिसर्च) डॉ. शाजिया इस्लाम ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। शोध के दौरान करीब सवा लाख बैंक खातों के डेटा सेट का विश्लेषण किया गया। परीक्षण में यह तकनीक 98 प्रतिशत मामलों में साइबर ठगी की सही पहचान करने में सफल रही है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि यह एआई मॉडल किसी एक संकेत के आधार पर निर्णय नहीं लेता बल्कि कई गतिविधियों का एक साथ विश्लेषण करता है। मसलन, यदि कोई ग्राहक देर रात अचानक किसी दूसरे राज्य या विदेश स्थित किसी अनजान खाते में बड़ी रकम भेजने का प्रयास करता है, तो सिस्टम उसे संदिग्ध गतिविधि के रूप में चिन्हित कर सकता है।
इसी तरह लगातार गलत पासवर्ड दर्ज होना, कम समय में अलग-अलग स्थानों से कई ट्रांजेक्शन की कोशिश होना या ग्राहक के सामान्य खर्च और भुगतान व्यवहार में अचानक बदलाव आना भी इस मॉडल की निगरानी में रहेगा।
खास बात यह है कि यह तकनीक केवल रकम के लेनदेन पर नजर नहीं रखेगी, बल्कि जिस खाते में पैसा भेजा जा रहा है, उसकी गतिविधियों का भी विश्लेषण करेगी। शोधकर्ताओं का दावा है कि सामान्य और फर्जी दोनों तरह के ट्रांजेक्शन के बड़े डेटा सेट पर परीक्षण के बाद यह मॉडल मौजूदा सुरक्षा प्रणालियों की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हुआ है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, आने वाले समय में इस तकनीक के व्यावसायिक उपयोग से आम लोगों की मेहनत की कमाई को साइबर ठगों से बचाने में मदद मिल सकती है।
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