लखनऊ , जून 22 -- उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों और उनसे होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने के लिए योगी सरकार ने बड़ी पहल की है। अब हाईवे और एक्सप्रेसवे ही नहीं, बल्कि शहरी और ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर भी वाहनों की अधिकतम गति वैज्ञानिक तरीके से तय की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार इसके लिए आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों और परिवहन विभाग ने संयुक्त रूप से 'उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी' का ड्राफ्ट तैयार किया है। हाल ही में परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन की अध्यक्षता में राज्य सड़क सुरक्षा तकनीकी सलाहकार समिति की अहम बैठक हुई। इसमें आईआईटी खड़गपुर द्वारा तैयार ड्राफ्ट पर विस्तार से चर्चा की गई।

परिवहन आयुक्त ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिन्हें संशोधन के जरिए ड्राफ्ट में शामिल किया जाएगा। इसके बाद अंतिम ड्राफ्ट को सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस नीति के तहत नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे के अलावा शहर की व्यस्त सड़कों, बाजार, स्कूल-कॉलेज के आसपास की सड़कों और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों के लिए भी अलग-अलग स्पीड लिमिट तय होगी। इसका मकसद वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित तरीके से सड़कों पर सुरक्षित गति सुनिश्चित कर हादसों को कम करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क की बनावट और ट्रैफिक घनत्व के अनुसार गति सीमा तय होने से दुर्घटनाओं में कमी आएगी और जान बचाई जा सकेगी। परिवहन विभाग 'सेफ सिस्टम अप्रोच' के तहत सुरक्षित सड़क, सुरक्षित गति, सुरक्षित सड़क उपयोगकर्ता, सुरक्षित वाहन और दुर्घटना के बाद की देखभाल पर भी फोकस कर रहा है। इसके साथ ही स्पीड ऑडिट, प्रवर्तन तंत्र, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, वाहनों का फिटनेस निरीक्षण और जन-जागरूकता अभियान के जरिए सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता में रखकर कई अभियान चला रही है। मंजूरी के बाद यह नीति विभिन्न विभागों के सहयोग से लागू की जा सकती है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित