कानपुर , जुलाई 15 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के 59वें दीक्षांत समारोह में बुधवार को स्नातक, स्नातकोत्तर और ई-मास्टर्स कार्यक्रमों के कुल 3,104 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं।
समारोह में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के अध्यक्ष, आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र एवं पद्मश्री से सम्मानित डॉ. पवन गोयनका मुख्य अतिथि रहे जबकि समारोह की अध्यक्षता आईआईटी कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के कार्यवाहक अध्यक्ष जयंत पाटिल ने की। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल भी उपस्थित रहे।
संस्थान के अनुसार इस वर्ष उपाधि प्राप्त करने वालों में 1,247 स्नातक, 1,325 स्नातकोत्तर तथा ई-मास्टर्स आउटरीच डिग्री कार्यक्रम के 532 विद्यार्थी शामिल रहे। दीक्षांत समारोह दो सत्रों में आयोजित किया गया। पहले सत्र में मुख्य सभागार में राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, निदेशक स्वर्ण पदक सहित विभिन्न पदक एवं पुरस्कार प्रदान किए गए, जबकि दूसरे सत्र में विभिन्न व्याख्यान कक्षों में विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से उपाधियां प्रदान की गईं। यह प्रक्रिया सीनेट पोस्ट ग्रेजुएट समिति (एसपीजीसी) तथा सीनेट अंडर ग्रेजुएट समिति (एसयूजीसी) के अध्यक्षों के नेतृत्व में सम्पन्न हुई।
डॉ. पवन गोयनका ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन 100 मीटर की दौड़ नहीं बल्कि एक लंबी इंजीनियरिंग परियोजना की तरह है, जिसमें असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ना पड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों को कभी हार न मानने, बड़े सपने देखने, लोगों पर विश्वास करने, निरंतर सीखते रहने और अपने दिल की आवाज सुनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य केवल सरकार का नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक का राष्ट्रीय संकल्प है और युवा इंजीनियरों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के कार्यवाहक अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा कि डिग्री केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने विद्यार्थियों से ईमानदारी, नवाचार और आजीवन सीखने की भावना बनाए रखते हुए समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि बदलते तकनीकी दौर में केवल जानकारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही प्रश्न पूछने, नैतिक निर्णय लेने और तकनीक के मानवीय प्रभाव को समझने की क्षमता ही वास्तविक बुद्धिमत्ता है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवनभर सीखते रहने और स्वयं को समयानुकूल विकसित करते रहने का आग्रह किया।
संस्थान के अनुसार इस वर्ष 390 पीएचडी, 53 एमटेक-पीएचडी संयुक्त डिग्री, एक एमडिजाइन-पीएचडी संयुक्त डिग्री, चार एमएस (रिसर्च)-पीएचडी संयुक्त डिग्री, 502 एमटेक, 852 बीटेक, 212 बीएस, 186 एमएससी, 59 एमबीए, 36 एमडिजाइन, 66 एमएस (रिसर्च), 40 पीजीपीईएक्स-वीएलएफएम, 35 डबल मेजर, 107 ड्यूल डिग्री, 28 एमएस-पीडी तथा ई-मास्टर्स कार्यक्रम के 492 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं।
समारोह में उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए राष्ट्रपति स्वर्ण पदक कम्प्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के सागर के. वी. को प्रदान किया गया। निदेशक स्वर्ण पदक स्टैटिस्टिक्स एंड डेटा साइंस के आदित्य वी. तथा एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के ऋत्विक शंकर को दिया गया। इसके अलावा एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के ध्रुव बुधेदेव को रतन स्वरूप स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के अन्य मेधावी विद्यार्थियों को भी अकादमिक उत्कृष्टता पुरस्कार एवं संस्थागत पदक प्रदान किए गए।
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