कानपुर , अक्टूबर 30 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर का साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र सी3आईहब उत्तर प्रदेश साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (यूपी-सीएसओसी) की स्थापना और संचालन करेगा।

उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में 104.28 करोड़ रुपये की इस परियोजना को मंजूरी दी है। सी3आईहब प्रारंभिक तीन वर्षों तक केंद्र के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगा। इस परियोजना का उद्देश्य राज्य के सरकारी डिजिटल बुनियादी ढांचे को साइबर हमलों और ऑनलाइन सुरक्षा खतरों से सुरक्षित करना है। इसके तहत सरकारी विभागों के डिजिटल नेटवर्क, एप्लिकेशन, डेटा और महत्वपूर्ण सूचना प्रणालियों की केंद्रीकृत निगरानी की जाएगी। केंद्र संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने, संभावित साइबर खतरों का आकलन करने और सुरक्षा संबंधी घटनाओं पर समयबद्ध कार्रवाई करने में मदद करेगा।

प्रस्तावित केंद्र में 24 घंटे साइबर सुरक्षा निगरानी की व्यवस्था होगी। इसके लिए थ्रेट इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। केंद्र सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी (ओटी) दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा निगरानी के साथ सिस्टम की कमजोरियों की पहचान और जोखिम का आकलन करेगा। साइबर हमलों की गंभीरता और उनके संभावित प्रभाव के आधार पर प्राथमिकता तय कर जांच, समन्वित कार्रवाई और घटना के बाद विश्लेषण भी किया जाएगा।

इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल), सिक्योरिटी इन्फॉर्मेशन एंड इवेंट मैनेजमेंट (एसआईईएम), सिक्योरिटी ऑर्केस्ट्रेशन, ऑटोमेशन एंड रिस्पॉन्स (एसओएआर) और नेटवर्क डिटेक्शन एंड रिस्पॉन्स (एनडीआर) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

परियोजना के तहत सरकारी विभागों के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ) और नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण, सुरक्षा कमजोरियों का आकलन, साइबर ड्रिल और स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट भी कराए जाएंगे। इसका उद्देश्य विभिन्न सरकारी विभागों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता और आपात स्थितियों से निपटने की क्षमता बढ़ाना है।

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर की स्थापना राज्य के डिजिटल बुनियादी ढांचे को लगातार बदलते साइबर खतरों से सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साइबर सुरक्षा में चूक से आवश्यक सेवाएं बाधित होने के साथ संवेदनशील डेटा की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि आईआईटी कानपुर का सी3आईहब अपनी विशेषज्ञता और तकनीकी दक्षता के साथ इस पहल का नेतृत्व करने में सक्षम है।

उन्होंने बताया कि सी3आईहब इससे पहले सेल के भिलाई स्टील प्लांट, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और भारतीय पत्तन संघ (आईपीए) जैसे प्रमुख संगठनों के लिए सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर स्थापित कर चुका है। इन परियोजनाओं से महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं की साइबर सुरक्षा और डिजिटल प्रणालियों के निर्बाध संचालन में केंद्र के अनुभव का पता चलता है।

उन्होंने विश्वास जताया कि इसी अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता के आधार पर सी3आईहब उत्तर प्रदेश के डिजिटल सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। इस पहल से सरकारी विभागों की साइबर सुरक्षा निगरानी, खतरों की पहचान और उन पर त्वरित कार्रवाई की क्षमता बढ़ेगी तथा डिजिटल शासन व्यवस्था और उससे जुड़ी जनसेवाओं को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

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