रुड़की , मई 21 -- उत्तराखंड के रुड़की स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने प्रमुख उद्योग संगठनों के सहयोग से गुरुवार को "उद्योग-शैक्षणिक सम्मेलन 2026" का आयोजन किया। सम्मेलन में नवाचार, अनुसंधान रूपांतरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, उद्यमिता और सतत औद्योगिक विकास पर संवाद किया गया।
आईआईटी निदेशक प्रोफेसर के. के. पंत ने नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देने तथा सामाजिक एवं औद्योगिक चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम प्रौद्योगिकियों के विकास को उद्योग-शैक्षणिक सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे सहयोग राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दृष्टिकोण के अनुरूप भी हैं, जो बहुविषयक शिक्षा, नवाचार, अनुभवात्मक अधिगम तथा शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत समन्वय को प्रोत्साहित करती है, ताकि समाज पर सार्थक प्रभाव डाला जा सके।
रुड़की के संयुक्त मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्रन सेठ ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकियों, सतत प्रथाओं और अनुसंधान-आधारित समाधानों के माध्यम से सहयोगात्मक नवाचार के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोगात्मक सहभागिता को सुदृढ़ करने के लिए अपना समर्थन भी व्यक्त किया, ताकि सतत विकास और प्रौद्योगिकी उन्नति को बढ़ावा दिया जा सके।
प्रायोजित अनुसंधान एवं औद्योगिक परामर्श के अधिष्ठाता प्रोफेसर विवेक कुमार मलिक ने प्रायोजित अनुसंधान, परामर्श, बौद्धिक संपदा सृजन, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पहलों के माध्यम से उद्योगों के साथ आईआईटी की बढ़ती सहभागिता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उद्योग हित धारकों के साथ निरंतर सहभागिता एक सशक्त नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण तथा शैक्षणिक अनुसंधान के प्रभाव को बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
शैक्षणिक मामलों के अधिष्ठाता प्रोफेसर नवीन कुमार नवानी ने उद्योग-उन्मुख अधिगम, अनुसंधान और नवाचार गतिविधियों में छात्रों की अधिक भागीदारी के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत उद्योग-शैक्षणिक सहयोग इंटर्नशिप, अनुभवात्मक अधिगम, सहयोगात्मक परियोजनाओं तथा बहुविषयक समस्या-समाधान के लिए बेहतर अवसर प्रदान करेगा, जिससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा और वे वास्तविक औद्योगिक एवं सामाजिक चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
विचार-विमर्श के दौरान प्रतिभागियों ने कई महत्वपूर्ण वास्तविक चुनौतियों पर चर्चा की। जिनमें प्रदूषण नियंत्रण, जल संसाधन प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन, भूस्खलन न्यूनीकरण, सतत विकास तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों एवं ई-कचरा प्रबंधन से संबंधित मुद्दे शामिल थे, जिनके लिए त्वरित प्रौद्योगिकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता है। औषधि क्षेत्र भी चर्चा का एक प्रमुख केंद्र रहा। जिसमें प्रक्रिया अनुकूलन, सतत विनिर्माण, अपशिष्ट प्रबंधन, विनियामक-आधारित नवाचार तथा उन्नत औषधि पैकेजिंग समाधानों पर विचार-विमर्श किया गया।
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