विजयवाड़ा , अप्रैल 18 -- आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के महासचिव एमवीएस नागी रेड्डी ने शनिवार को श्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि निधि की कमी के कारण फसलों की खरीद करने में अपनी असमर्थता दिखाना गैर-जिम्मेदाराना और चिंताजनक है, खासकर तब, जब किसान गहरे संकट में हैं।
श्री रेड्डी ने कहा कि राज्य सरकार की यह स्पष्ट ज़िम्मेदारी है कि वह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद सुनिश्चित करे, विशेष रूप से उन मक्का किसानों के लिए जो गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। तेलंगाना, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में खरीद होने के बावजूद आंध्र प्रदेश सरकार कोई कदम उठाने में विफल रही है और उसने खुद को केवल केंद्र सरकार को पत्र लिखने तक ही सीमित रखा है।
उन्होंने बताया कि मौजूदा रबी सीज़न के दौरान 5.02 लाख हेक्टेयर ज़मीन पर मक्के की खेती की गई थी, जो कि 1.96 लाख हेक्टेयर के शुरुआती अनुमान से कहीं ज़्यादा है। वहीं, उत्पादन भी अनुमानित 16.31 लाख टन के मुकाबले 35 लाख टन से ज़्यादा रहा। सरकारी खरीद की कमी और बाज़ार में प्रतिस्पर्धा न होने के कारण किसानों को मक्का 1,400 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जो कि एमएसपी की दर 2,400 रुपये से काफी कम है। उत्पादन लागत 2,000 से 2,200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच आती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि खरीद केंद्र न खुलने के कारण किसान बिचौलियों के भरोसे रह गए हैं। इसकी तुलना पिछली वाईएसआरसीपी सरकार से करते हुए उन्होंने बताया कि उस समय मार्कफेड के ज़रिए मक्के की खरीद सक्रिय रूप से की जाती थी। वर्ष 2019-20 में 4.17 लाख टन, 2020-21 में 3.06 लाख टन और 2022-23 में 73,302 टन मक्के की खरीद की गई थी।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की लापरवाही के कारण राज्य के मक्का किसानों को 2,500 करोड़ से 3,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने मांग की कि सरकार अपनी निष्क्रियता से तुरंत जागे और एमएसपी पर मक्का खरीदने के लिए तत्काल कदम उठाए, ताकि उन किसानों को राहत मिल सके जो गठबंधन सरकार के शासन में एक अभूतपूर्व आर्थिक संकट की ओर धकेले जा रहे हैं।
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