विजयवाड़ा , मार्च 30 -- प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नौ सदस्यों ने सोमवार को आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हरीश कुमार गुप्ता के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में केंद्रीय समिति के सदस्य (सीसीएम) और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (एओबीएसजेडसी) के सचिव चेल्लूरी नारायण राव उर्फ 'सुरेश' भी शामिल हैं।

पचपन वर्षीय माओवादी नेता नारायण राव उर्फ 'सुरन्ना' पिछले तीन दशकों से तत्कालीन पीपुल्स वार ग्रुप (पीडब्लूजी) से सक्रिय रूप से जुड़े थे। वह आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के वज्रपुकोत्तुरू मंडल के बाथुपुरम गांव के रहने वाले हैं।

आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादियों को मीडिया के सामने पेश किया गया।

नारायण राव 1989-90 में पीडब्लूजी में शामिल हुए थे और सैन्य अभियानों में विशेषज्ञता हासिल करते हुए संगठन में लगातार ऊंचे पदों पर पहुंचे। पिछले तीन दशकों के दौरान, उन्होंने आंध्र-ओडिशा सीमा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।

आत्मसमर्पण करने वाले इस माओवादी के खिलाफ आंध्र प्रदेश और ओडिशा दोनों राज्यों में कई आपराधिक मामले दर्ज थे और उनकी गिरफ्तारी पर इनाम भी घोषित था। 1990 में माओवादी आंदोलन से जुड़ने वाले नारायण राव 2018 में अविभाजित विशाखापत्तनम जिले में तत्कालीन विधायक किदारी सर्वेश्वर राव और पूर्व विधायक सिवेरी सोमेश्वर राव की हत्या के साथ-साथ तीन पुलिसकर्मियों की हत्या जैसे बड़े अपराधों में शामिल रहे थे।

इस अवसर पर मीडिया को संबोधित करते हुए आंध्र प्रदेश के डीजीपी हरीश कुमार गुप्ता ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने राइफलों सहित बड़ी मात्रा में हथियार सौंपे हैं। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस और माओवादियों के बीच सात मुठभेड़ें हुई थीं। इनमें माओवादी नेता हिड़मा सहित 18 माओवादी मारे गये थे। पुलिस ने तीन 'एक्शन टीम' सदस्यों सहित 31 माओवादियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 106 माओवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है।

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