विजयवाड़ा , अगस्त 19 -- आंध्र प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री नारा लोकेश ने विशाखापत्तनम में डेटा केंद्र बनाने के राज्य सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इनके लिए ज़रूरी पर्यावरण और पानी की ज़रूरतों के बारे में जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है।
जन सेना की विधायक एल.एन. माधवी के सवाल का जवाब देते हुए श्री लोकेश ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि विशाखापत्तनम में निवेश करने के गूगल के फैसले से शहर में दूसरी आईटी कंपनियों की दिलचस्पी भी बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) आधारित डिजिटल अर्थव्यवस्था और भारत की डेटा संप्रभुता के लिए डेटा केंद्र बहुत ज़रूरी हैं, खासकर उभरती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच। उन्होंने बताया कि जब प्रस्तावित डेटा केंद्र पारिस्थितिक तंत्र 6.5 जीडब्ल्यू की तय क्षमता तक पहुँच जाएगा, तो मौजूदा तकनीक के आधार पर सालाना लगभग तीन टीएमसी पानी की ज़रूरत होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि नयी कूलिंग तकनीकों से पानी की खपत और कम होने की उम्मीद है।
श्री लोकेश ने बताया कि डेटा केंद्रीय के लिए पानी पोलावरम के पानी के औद्योगिक आवंटन से लिया जाएगा, न कि शहर के निवासियों के लिए तय पानी से। उन्होंने कहा कि सरकार पोलावरम के ज़रिए विशाखापत्तनम की शहरी पानी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और 18 महीनों के भीतर ग्रेविटी-आधारित आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि डेटा केंद्रों के लिए अलग पाइपलाइनें दी जाएंगी।
पानी की खपत की तुलना करते हुए मंत्री लोकेश ने कहा कि एक जीडब्ल्यू का तापीय विद्युत संयंत्र डेटा केंद्र की तुलना में सालाना लगभग 10 गुना ज़्यादा पानी इस्तेमाल करता है। उन्होंने कहा कि पानी के इस्तेमाल को लेकर विरोध सिर्फ़ डेटा केंद्रों को लेकर ही क्यों हो रहा है।
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने डेटा-सेंटर आवंटन के लिए 6.5 जीडब्ल्यू की स्पष्ट सीमा तय की थी और घोषणा की थी कि यह लक्ष्य अब पूरी तरह हासिल कर लिया गया है; उन्होंने कहा कि सरकार उन कंपनियों को प्राथमिकता देगी जो मज़बूत पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी दिखाएंगी।
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