विजयवाड़ा , अप्रैल 25 -- आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में डीजल की कमी के कारण धान की कटाई और मछली पालन का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

संयुक्त कृष्णा, पश्चिम गोदावरी, पूर्वी गोदावरी और गुंटूर सहित तटीय जिलों में धान की कटाई का काम इस समय जोरों पर है। चूंकि कटाई की मशीनें डीजल से चलती हैं, इसलिए डीजल की कमी के कारण एजेंसियां किसानों को मशीनें उपलब्ध कराने में असमर्थता जता रही हैं। कृषि श्रमिकों की कमी के कारण किसान मशीनों पर निर्भर हैं, लेकिन पार्वतीपुरम, विजयनगरम और अन्य जिलों के पेट्रोल पंपों पर 'स्टॉक नहीं है' के बोर्ड लगे होने के कारण किसानों को डीजल के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

धान की खेती के लिए प्रसिद्ध पश्चिम और पूर्वी गोदावरी जिलों में डीजल के अभाव में कटाई का काम ठप हो गया है। किसान अब फसल काटने के लिए खेतिहर मजदूरों को जुटाने के प्रयास कर रहे हैं।

मछली पालने वाले किसान एरिएटर की मदद से झींगा तालाबों में ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए हैवी-ड्यूटी जनरेटर का उपयोग करते हैं। डीजल उपलब्ध न होने के कारण किसानों ने एरिएटर का उपयोग कम कर दिया है, जिससे तालाबों में ऑक्सीजन की कमी हो गई है। किसानों को डर है कि ऑक्सीजन कम होने से मछलियां मर सकती हैं। चल्लापल्ली गांव के एक किसान ने बताया कि डीजल की कमी के कारण परिवहन वाहन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे वे मछलियों का चारा और दवाएं नहीं ला पा रहे हैं।

डीजल के लिए पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। कुछ किसानों ने आरोप लगाया कि पेट्रोल पंप संचालक भविष्य में कीमतों में वृद्धि की उम्मीद में डीजल की जमाखोरी कर रहे हैं। किसानों ने सरकार से पर्याप्त डीजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की है।

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