नयी दिल्ली , अप्रैल 02 -- राज्य सभा ने अमरावती को आंध्र प्रदेश राज्य की राजधानी शहर के रूप में मान्यता के स्पष्ट प्रावधान वाले आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अधिनियम 2026 को आज संक्षिप्त चर्चा के बाद ध्वनिमत से मंजूरी दी।

इसके साथ ही इस विधेयक पर संसद के दोनों सदनों की मुहर लग गयी है। लोकसभा ने इसे बुधवार को ही पारित कर दिया था। राज्य सभा में इस विधेयक को गृह मंत्री अमित शाह की ओर से गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने चर्चा और पारित कराने के लिए प्रस्तुत किया और चर्चा में केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापू राममोहन नायडू ने भी भाग लिया। चर्चा के अंत में श्री नित्यानंद राय के संक्षिप्त वक्तव्य के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दी।

सभापति श्री सीपी राधाकृष्णन ने पूरे सदन और देशवासियों की ओर से आंध्र प्रदेश के लोगों को उनकी नयी राजधानी अमरावती के लिए शुभकामनाएं दीं और भगवान वेंकटेश से राज्य की प्रगति के लिए विशेष प्रार्थना की।

चर्चा में भाग लेते हुए श्री राममोहन नायडू ने इसे एक ऐतिहासिक अवसर तथा तेलुगू भाषी लोगों के लिए एक भावनात्मक क्षण बताते हुए कहा कि देश के सबसे सम्पन्न, विविधतापूर्ण तथा प्रतिभाशाली लोगों के धनी आंध्रप्रदेश को पहली बार अपनी राजधानी मिल रही है।

उन्होंने इस विधेयक को अमरावती के लिए 12 साल से संघर्षरत किसानों और महिलाओं की जीत बताया। श्री नायडू ने कहा कि इस विधेयक से राज्य की राजधानी के बारे में स्पष्टता लाने की लंबी प्रतीक्षा पूरी हुई है और इससे देश के राजनीतिक नेतृत्व और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति आस्था पुन: सुदृढ हुई है।

केंद्रीय मंत्री ने वाईएसआर कांग्रेस का नाम लिए बिना उसके नेतृत्व में 2019 में बनी पिछली सरकार के दौर में राजधानी अमरावती की अवधारणा को नष्ट करने के प्रयासों की कटु आलोचना की । उन्होंने पूर्व मुख्य मंत्री जगन मोहन रेड्डी का नाम लिए बिना कहा कि 2019 में बनी सरकार के बाद उसके नेता ने राज्य में तीन राजधानियों के बनाने का प्रस्ताव कर न केवल अमरावती की योजना को नष्ट किया बल्कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को एक दूसरे के खिलाफ उकसाने की अंग्रेजों वाली -फूट डालो, राज करो की नीति अपनायी।

उन्होंने कहा कि 2024 के चुनाव में आंध प्रदेश में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की प्रचंड बहुमत के साथ जीत ने विभाजन की उस राजनीति को न केवल नकार दिया बल्कि यह दर्शाया कि राज्य के सभी अंचल राजधानी के रूप में अमरावती के साथ हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सितंबर 2024 में राज्य विधान सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था कि पुनगर्ठित आंध प्रदेश राज्य की नयी राजधानी कृष्णानदी के तट पर होगी और यह दुनिया के सबसे भव्य राजधानी नगरों में से एक होगी। इसका नाम सातवाहन नरेशों की राजधानी अमरावती के नाम पर रखा जाएगा।

श्री नायडू ने कहा कि अमरावती के लिए आस पास के 29 हजार किसानों ने 34000 एकड़ जमीन स्वेच्छा से दी थी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक वहां के किसानों और महिलाओं के 1600 दिन के संघर्ष की जीत है।

चर्चा शुरू करते हुए कांग्रेस की रेणुका चौधरी ने भी इसे अमरावती के किसानों और महिलाओं की जीत बताया। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश की राजधानी के विकास का काम समयबद्ध तरीके से हो, उसमें पारदर्शिता रखी जाए तथा 2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के समय पुनर्गठित आंध्र प्रदेश राज्य के साथ किये गये सभी वायदों को पूरा किया जाए।

भाजपा के डॉ के लक्ष्मण ने कहा कि वह अमरावती के किसानों का नमन करते हैं जिन्होंने अमरावती के लिए जमीन दी और संघर्ष किया। चर्चा में तृणमूल कांग्रेस के मोहम्मद नदीमुल हक, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह , भाजपा के रयागा कृष्णैया , बीजू जनता दल के निरंजन बिशी, राजद के संजय यादव, बीआरएस के केआर सुरेश, टीडीपी के मस्तान राव यादव बीधा, शिवसेना (उबाठा) की प्रियंका चतुर्वेदी तथा अन्य सदस्यों ने विधेयक का समर्थन किया।

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