विजयवाड़ा , अगस्त 7 -- आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए 'एकीकृत पैदल यात्री सुरक्षा एवं सार्वभौमिक पहुंच नीति, 2026' को अपनी मंजूरी दे दी है।
इस नीति का खास मकसद राज्य में सड़कों की योजना, निर्माण और निगरानी के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाना है।
इस नीति का मूल ध्येय 'वाहन-केंद्रित' सड़क डिजाइन के बजाए 'व्यक्ति-केंद्रित' बुनियादी ढांचे की ओर बढ़ना है, ताकि बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों सहित सभी नागरिकों के लिए सड़कें सुरक्षित और सुलभ हो सकें। यह ढांचा पूरे राज्य के शहरी, ग्रामीण, कस्बा में लागू किया जाएगा। यह नई परियोजनाओं के साथ-साथ मौजूदा बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर भी लागू होगा।
यह नीति देश में सड़क सुरक्षा की गंभीर चुनौती की पृष्ठभूमि में लाई गई है। वर्ष 2023 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं में 1,72,890 लोगों की जान गई थी, जिनमें 35,221 पैदल यात्री शामिल थे। सड़क हादसों में मौतों का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पैदल यात्रियों का है। उच्चतम न्यायालय ने भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार के तहत सुरक्षित व अतिक्रमण मुक्त फुटपाथों को स्वीकार किया है और लोगों को केंद्र में रखकर सड़कों को बनाने का आह्वान किया है।
नीति की एक मुख्य विशेषता व्यापक सड़क-सुरक्षा ऑडिट को संस्थागत रूप देना है। सड़कों, चौराहों, क्रॉसिंग और अधिक आवाजाही वाली जगहों का वैज्ञानिक रूप से मूल्यांकन किया जाएगा, जबकि दुर्घटना के लिहाज से संवेदनशील स्थानों पर प्राथमिकता से ध्यान दिया जाएगा।
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