तिरुमला , सितंबर 16 -- आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को तिरुमला को एक पवित्र तीर्थ और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कई उपायों की घोषणा की। इनमें श्रद्धालु कल्याण, मंदिर विकास, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण शामिल हैं।
देवस्थानम मंत्री अनम रामनारायण रेड्डी और टीटीडी अध्यक्ष बीआर नायडू के साथ मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तिरुमला पहाड़ियों का 89.5 प्रतिशत हिस्सा हरित क्षेत्र से आच्छादित है।
श्री नायडू ने कहा कि भगवान वेंकटेश्वर की महिमा, तिरुमला का इतिहास, पौराणिक आख्यानों और भगवान के दिव्य विवाह को प्रदर्शित करने के लिए श्री वेंकटेश्वर संग्रहालय का आधुनिकीकरण कर इसे पुनः खोल दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय की स्थापना टीसीएस ट्रस्ट के 104 करोड़ रुपये की लागत से की गयी है और अगले पांच वर्षों तक वही ट्रस्ट इसका रख-रखाव करेगा।
श्री नायडू ने कहा कि टीटीडी ने एलआईसी के सहयोग से प्रत्येक श्रद्धालु को बीमा कवर प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके तहत आधार-आधारित ऑनलाइन बीमा सुविधा शुरू की जायेगी और तिरुमला में किसी श्रद्धालु की मृत्यु होने पर दो लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी।
उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं को भगवान वेंकटेश्वर की महिमा, मंदिर के इतिहास और संबंधित पहलुओं से अवगत कराने के लिए वैकुंठम कतार परिसर-I में एक 'हीलिंग एक्सपीरियंस सेंटर' स्थापित किया गया है। श्री नायडू ने कहा कि तिरुमला में श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए 32 इलेक्ट्रिक बसें शुरू की गयी हैं। रिलायंस फाउंडेशन ने 25 ईवी बसें और भारत बायोटेक ने सात बसें टीटीडी को दान में दी हैं।
उन्होंने बताया कि इन नयी बसों के जुड़ने के साथ ही श्रद्धालुओं के परिवहन के लिए उपलब्ध इलेक्ट्रिक बसों की कुल संख्या बढ़कर 44 हो गयी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य मंदिरों को आध्यात्मिकता के केंद्र के रूप में विकसित करना है। 'श्रीवाणी' कार्यक्रम के तहत राज्य भर में 5,000 श्रीवारी मंदिरों का निर्माण करने और मौजूदा पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार करने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा कि श्रीवारी सेवा स्वयंसेवकों को भी इन मंदिरों से जोड़ा जायेगा। उन्होंने बताया कि राज्य भर में लगभग 12 लाख लोगों ने श्रीवारी सेवा स्वयंसेवकों के रूप में पंजीकरण कराया है।
श्री नायडू ने कहा कि सरकार की योजना दुनिया भर के उन शहरों में भी श्रीवारी मंदिर स्थापित करने की है, जहां बड़ी संख्या में हिंदू आबादी रहती है। इसके साथ ही राज्य के विधानसभा क्षेत्रों के मुख्यालयों और अन्य स्थानों पर भी मंदिर बनाये जायेंगे।
उन्होंने कहा कि अन्नप्रसादम ट्रस्ट के पास 3,165 करोड़ रुपये का कोष उपलब्ध है और अन्नप्रसादम सेवाओं में और सुधार के लिए कदम उठाये जायेंगे। उन्होंने बताया कि प्राणदानम ट्रस्ट के पास 191 करोड़ रुपये और बीआईआरआरडी कॉर्पस ट्रस्ट के पास 240 करोड़ रुपये का कोष है।
श्री नायडू ने कहा कि एसवीआईएमएस, बीआईआरआरडी, रुइया अस्पताल और बाल चिकित्सालय सहित अन्य अस्पतालों को एकीकृत किया जायेगा, जबकि डॉक्टरों को अस्पतालों में श्रीवारी सेवा स्वयंसेवकों के रूप में सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि 'मानव सेवा ही माधव सेवा' के ध्येय वाक्य के तहत मरीजों की सेवा करने और चिकित्सा उपचार में सुधार के लिए उपाय किए जायेंगे। तिरुपति के अस्पतालों को एकीकृत करने के लिए भी एक योजना तैयार की जायेगी।
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