विजयवाड़ा , अप्रैल 03 -- आंध्र प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान मदिरा की खपत में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गयी है, जिसमें कुल बिक्री मूल्य 6.11 प्रतिशत बढ़कर 31,237 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, लेकिन इस तेजी के बाद भी आबकारी राजस्व में भी 0.68 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई है, जो अब 29,042 करोड़ रुपये हो गया है।

शुक्रवार को जारी आधिकारिक आबकारी आंकड़ों के अनुसार, एक अप्रैल से 31 मार्च तक की एक साल की अवधि के दौरान भारतीय निर्मित विदेशी मदिरा (आईएमएल) की बिक्री 362 लाख पेटी से बढ़कर 414 लाख पेटी हो गयी, जबकि बीयर की बिक्री 136 लाख पेटी से उछलकर 232 लाख पेटी पर पहुंच गयी है।आबकारी अधिकारियों ने इस वृद्धि के पीछे त्योहारों की मांग, नये साल के जश्न और बीयर की कीमतों में दी गयी ढील को मुख्य वजह बताया है।

राजस्व के मोर्चे पर एक विरोधाभास भी सामने आया है, जहां रिकॉर्ड बिक्री के बावजूद राज्य के कुल मदिरा-लिंक्ड राजस्व में केवल 196 करोड़ रुपये की ही वृद्धि हुई है। इसका प्रमुख कारण 'लाइसेंस शुल्क और अन्य' मद में होने वाले संग्रह में 19.37 प्रतिशत की गिरावट आना है, जो 4,112 करोड़ रुपये से घटकर 3,316 करोड़ रुपये रह गया है। अधिकारियों के मुताबिक, 180 मिलीलीटर वाली 99 रुपये की बोतलों की बिक्री बढ़ाने और प्रमुख ब्रांडों की कीमतों में कटौती करने से सरकारी खजाने को क्रमशः 442 करोड़ रुपये और 978 करोड़ रुपये का भार उठाना पड़ा है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सस्ती बीयर और छोटी बोतलों के विकल्प ने युवा उपभोक्ताओं को अपनी ओर आकर्षित किया है। वर्तमान में राज्य सरकार मदिरा से प्राप्त होने वाले राजस्व पर अपनी निर्भरता और स्वास्थ्य नीति के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना कर रही है। कीमतों में कटौती और गैर-वापसी योग्य शुल्क की कमी के कारण बिक्री में बढ़ोतरी के बावजूद राजस्व वृद्धि उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है।

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