विजयवाड़ा , मार्च 18 -- ऑल इंडिया बहुजन समाज पार्टी, क्रिश्चियन कोऑर्डिनेशन काउंसिल के प्रतिनिधियों और समुदाय के नेताओं ने दलित मूल के ईसाइयों को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा देने की मांग को तेज कर दिया है। समुदाय के नेताओं ने आंध्र प्रदेश की सरकारों पर इस मुद्दे को हल करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए गहरी चिंता व्यक्त की है।

पूर्व डीजीपी डॉ. जे. पूर्णचंद्र राव ने बुधवार को मीडिया को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि पिछले दशकों में कम्मा और रेड्डी जैसे प्रभावशाली समुदायों के मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व वाली सरकारों ने केंद्र से अनुकूल निर्णय लेने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक प्रभाव होने के बावजूद इस विषय को प्राथमिकता नहीं दी गई।

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षण के कार्यान्वयन का उदाहरण देते हुए डॉ. राव ने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व ने सवर्ण और प्रभावशाली समुदायों को लाभ पहुंचाने के लिए बड़ी तत्परता और समन्वय के साथ काम किया। इसके विपरीत, दलित ईसाइयों की लंबे समय से लंबित मांग पर वैसी तात्कालिकता नहीं दिखाई गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकारें कम्मा और रेड्डी समुदायों के लिए ईडब्ल्यूएस आरक्षण सुनिश्चित करने हेतु तेजी से कदम उठा सकती हैं, तो पिछले सात दशकों से दलित ईसाइयों को एससी दर्जा दिलाने के लिए तुलनात्मक प्रयास क्यों नहीं किए गये हैं।

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