, April 1 -- भाजपा की डॉ डी पुरंदेश्वरी ने कहा कि 2014 में आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना की प्रशासनिक राजधानी हैदराबाद थी। हैदराबाद तेलंगाना के पास गया लेकिन आंध्र के पास न राजधानी थी और ना ही विधानसभा भवन, राजभवन तथा सचिवालय आदि था। इसी दौरान अमरावती को राजधानी बनाने का प्रस्ताव आया जिसके लिए किसानों ने अपनी 34 हजार हेक्टेयर उपजाऊ भूमि दी। बाद में राजधानी का क्षेत्र विस्तारित करने के लिए 50 हजार हेक्टेयर भूमि की बात की गई।

उन्होंने कहा कि 1953 में आंध्र प्रदेश राज्य का गठन भाषायी आधार पर हुआ था लेकिन विभाजन के बाद इसी राज्य के लिए 2024 तक राजधानी को लेकर अनिश्चितता रही। उनका कहना था कि अब इसमें राजधानी को लेकर यदि कोई बदलाव आता है या कोई अन्य स्थिति आती है तो यह मामला संसद में आवश्यकरूप से आना चाहिए। उन्होंने वाईएसआर पर आरोप लगाया कि यह पार्टी अमरावती को राजधानी बनाने के पक्ष में नहीं है इसीलिए इस दल की सरकार ने अमरावती पर ध्यान नहीं दिया।

शिवसेना उद्धव गुट के अरविंद सावंत ने कहा कि अमरावती को खूबसूरत राजधानी के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि जिन किसानों ने अमरावती को बसाने के लिए अपनी जमीन दी है उनके साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए और उन्हें नौकरी तथा मुआवजा सभी नियमानुसार मिलना चाहिए और समय पर उनकी मांग पूरी होनी चाहिए।

कांग्रेस के वी कृष्णा गद्दाम ने कहा कि तेलंगाना के साथ आरंभ से ही न्याय नहीं हुआ है और इस राज्य के लोगों को अब भी विभाजन का न्याय नहीं मिल रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस शरद गुट के बजरंग सोनवाने कहा कि पुनर्गठन के 13 साल आंध्र प्रदेश की राजधानी के लिए विधेयक है और इसे पारित कर राजधानी के लिए जमीन देने वाले किसानों के साथ न्याय किया जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि आंध्र प्रदेश में मेादी सरकार ने विकास के कार्य किए हैं, वहां विश्वविद्यालय खोले हैं और हवाई अड्डों का विकास किया गया है। सरकार ने वहां एक लाख 30 हजार करोड़ रुपए का निवेश कर राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास किया है और विकास कार्यों को गति दी जा रही है। उनका कहना था कि अमरावती को सर्व साधन संपन्न राजधानी के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

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