नयी दिल्ली , अक्टूबर 09 -- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंगनवाड़ी केंद्रों को जनभागीदारी का केंद्र बनाने पर जोर देते हुए कहा है कि इन केंद्रों के आसपास रहने वाले परिवारों को खास मौकों पर बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन, खिलौने और स्थानीय जरूरत की चीजें देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को सुषमा स्वराज भवन में महिला एवं बाल विकास विभाग के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए ये सुझाव दिये।उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच मिलकर फैसले लेने की प्रक्रिया को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने राज्यों को जिला स्तर के साथ नगर पालिका और महानगर पालिका स्तर पर भी चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए अलग चिंतन शिविर आयोजित करने पर भी जोर दिया, ताकि वे अपने अनुभव, नए प्रयोग और काम के दौरान सामने आने वाली समस्याओं के समाधान साझा कर सकें।
श्री मोदी ने विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को भी आंगनवाड़ी केंद्रों से जोड़ने की बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय अपने आसपास के आंगनवाड़ी केंद्रों को गोद लेकर वहां किये जा रहे काम के सामाजिक प्रभाव का अध्ययन कर सकते हैं। इससे छात्रों को योगदान देने का मौका मिलेगा और सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए उपयोगी जानकारी भी मिलेगी। मेडिकल के छात्रों, एनएसएस और एनसीसी के स्वयंसेवकों को भी इन केंद्रों और सामुदायिक गतिविधियों से जोड़ने की बात कही।
प्रधानमंत्री ने किशोरियों के स्वास्थ्य, पोषण और समग्र विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बतायी। महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने बच्चों की उम्र के हिसाब से ऐसे पाठ्यक्रम तैयार करने का सुझाव दिया, जिनमें महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तीकरण के बारे में जानकारी दी जाये। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कदमों में विभिन्न विभागों के बीच तालमेल जरूरी है।
श्री मोदी ने स्वच्छता, स्वास्थ्य और पोषण के आपसी संबंध पर जोर देते हुए महिला एवं बाल विकास विभागों से स्वच्छता अभियान की जिम्मेदारी सक्रिय रूप से निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अच्छा स्वास्थ्य और पोषण स्वच्छता से शुरू होता है। आंगनवाड़ी केंद्र और उनके आसपास के समुदाय स्वच्छता से जुड़ी अच्छी आदतें विकसित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने महिला सशक्तिकरण के लिए 'वोकल फॉर लोकल' और 'एक जिला, एक उत्पाद' अभियान को बढ़ावा देने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि महिला समूह और सामुदायिक संस्थाएं स्थानीय उत्पादों, आजीविका और महिलाओं की आर्थिक मजबूती को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भागीदार बन सकती हैं।
सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने पोषण, छोटे बच्चों की देखभाल, बाल संरक्षण, महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और राज्यों के संबंधित विभागों की जिम्मेदारी समाज के बड़े और महत्वपूर्ण हिस्से से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि आज आंगनवाड़ी केंद्रों में देखभाल और पोषण पाने वाले बच्चे ही आगे चलकर विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने वाले युवा और नागरिक बनेंगे।
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