जयपुर , जुलाई 19 -- राजस्थान में चिकित्सा विभाग द्वारा संचालित किये गये अभियान में विभिन्न गतिविधियां संचालित की गयीं, जिनमें इस जुलाई में सीकर, नागौर, जालौर, बांसवाड़ा और चूरू जिले में सबसे अधिक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाएं चिह्नित की गयी हैं।

राज्य के मुख्य सचिव ने रविवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य गतिविधियों की विस्तार से जानकारी ली एवं आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्रत्येक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला की नामवार लिस्ट तैयार करें। साथ ही एएनएम तथा सीएचओ को प्रत्येक हाईरिस्क गर्भवती महिला के साथ नियमित मॉनिटरिंग के लिए अटैच करें। आवश्यकता होने पर रेफरल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें। उन्होंने प्रदेशभर के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों एवं जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारियों को सोमवार को सुबह एएनएम की बैठक लेकर लाइनलिस्ट और उसके कारणों की समीक्षा के निर्देश दिये, ताकि समय रहते आवश्यक इंटरवेंशन किया जा सके।

उन्होंने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों एवं गायनी विभागाध्यक्ष गत 24 घंटों में सामान्य एवं सिजेरियन ऑपरेशन से प्रसव एवं उनकी वर्तमान हालत के बारे में जानकारी ली एवं आवश्यक दिशा-निर्देश दिये।

श्री श्रीनिवास ने कहा कि प्रत्येक चिकित्सालय में प्रसव सहित विभिन्न ऑपरेशन्स के लिए स्टेंडर्ड ऑपरेशन प्रोसीजर की पालना सुनिश्चित करें। इस दौरान विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञों ने लेबर रूम प्रोटोकॉल, इंफेक्शन कंट्रोल, एनस्थीसिया, बोयोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, कोल्ड चैन मैनेजमेंट, रैफरल प्रोटोकॉल आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश के सभी अस्पतालों में आवश्यक प्रोटोकॉल्स की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने प्रसव के बाद अगले 24 घंटे धात्री महिला की इंटेसिव निगरानी रखने एवं उसके पोषण का समुचित रूप से ध्यान रखने के निर्देश दिये।

उन्होंने कहा कि जिन गर्भवती महिलाओं के सीवियर एनीमिया है और जिनकी ड्यू डेट आने वाली है, उन्हें अगले आवश्यकता अनुसार ब्लड ट्रांस्फ्यूजन या एफसीएम इंजेक्शन या अल्टरनेट दिवस में आयरन शुक्रोज इंसर्शन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये, ताकि उन्हें माइल्ड या सामान्य स्थिति में लाया जा सके। उन्होंने कहा कि जिस भी जिले में छह ग्राम या इससे कम हीमोग्लोबिन या और कोई उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की नामवार जानकारी एएनएम के साथ-साथ जिले के आरसीएचओ एवं सीएमएचओ द्वारा रखी जाये। इन गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए संबंधित एएनएम द्वारा प्रत्येक तीसरे दिन जांच की जानी आवश्यक है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए प्रसव नियोजन जैसे उनकी स्वास्थ्य स्थिति के मुताबिक आवश्यक अस्पताल का चयन, प्रसव की तिथि की जानकारी एवं रेफरल जैसी व्यवस्थाओं का समुचित प्रबंधन करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह भी ध्यान रखा जाये कि गर्भवती महिला के ममता कार्ड पर पूर्ण एवं सही जानकारी स्पष्ट भाषा में अंकित की जानी आवश्यक है।

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