लखनऊ , सितंबर 10 -- पूर्व राज्यसभा सांसद और बसपा नेता अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी प्रमुख मायावती को संबोधित पत्र में राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने की घोषणा की है।

उन्होंने कहा है कि उनके लिए मायावती का आदेश दुनिया की किसी भी चीज से बढ़कर है और यदि उन्हें लगता है कि उनके राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन में रहने से बहुजन मिशन को नुकसान पहुंच रहा है तो वह तत्काल संन्यास ले रहे हैं।

सुश्री मायावती को लिखे पत्र में सिद्धार्थ ने कहा है कि वह पिछले 35 वर्षों से बसपा, मान्यवर कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहे हैं। उन्होंने मायावती को अपनी राजनीतिक गुरु और बड़ी बहन बताते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें विधान परिषद और राज्यसभा का सदस्य बनने का अवसर दिया। सिद्धार्थ ने अपने ऊपर पार्टी पर कब्जा करने और मायावती के भतीजे आकाश आनंद को गुमराह करने के आरोपों को साजिश बताया। उन्होंने कहा कि इन आरोपों में लेशमात्र भी सच्चाई नहीं है और ये उनके राजनीतिक विरोधियों की साजिश है।

आकाश आनंद को लेकर उन्होंने कहा कि कई महीनों से उनसे उनकी मुलाकात भी नहीं हुई है। उन्होंने मायावती से आग्रह किया कि उनके संन्यास को आकाश आनंद की वापसी से न जोड़ा जाए। सिद्धार्थ ने कहा कि आकाश पहले मायावती के भतीजे हैं और उन्होंने करीब दो दशक उनकी छत्रछाया में बिताए हैं। आकाश को जिम्मेदारी देना या नहीं देना मायावती का फैसला है।

उन्होंने कहा कि यदि मायावती को लगता है कि उनके राजनीति और सामाजिक जीवन में रहने से बहुजन मिशन को नुकसान हो रहा है तो वह इसी समय संन्यास ले रहे हैं। पत्र के अंत में उन्होंने 'जय भीम, जय भारत और जय बहुजन समाज' का नारा लिखा।

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही मायावती ने ट्वीट करके अशोक सिद्धार्थ पर निशाना साधा था। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद की पार्टी में वापसी को लेकर बड़ी शर्त रखी है। उन्होंने कहा था कि आकाश के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ यदि अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा छोड़कर राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लेते हैं, तभी आकाश आनंद को फिर से जिम्मेदारी देने पर विचार किया जाएगा।

सुश्री मायावती ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर छह बिंदुओं में पोस्ट कर कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव बहुत नजदीक हैं और ये तीनों राज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के 'बहुजन समाज' को शासित से शासक वर्ग बनाने के मिशन के लिए अति महत्वपूर्ण हैं।

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