मुरादाबाद , अगस्त 13 -- उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में दशकों से अवैध और कच्ची शराब के कारोबार के लिए चर्चित रही भातू और हबूड़ा बस्तियां अब विकास और सामाजिक बदलाव की नई पहचान बन रही हैं।

जिला प्रशासन, पुलिस और समाज कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयासों से करीब 600 परिवारों ने अवैध गतिविधियों को छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने का रास्ता अपनाया है। सरकार इन बस्तियों को आदर्श कॉलोनी के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए चलाए गए विशेष अभियानों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। बस्ती के 120 से अधिक युवा ई-रिक्शा चलाकर आजीविका कमा रहे हैं, जबकि 50 लोग निजी सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत हैं। इसके अलावा 50 परिवारों ने दुकान और ठेला लगाकर स्वरोजगार शुरू किया है। 110 लोग दिहाड़ी मजदूरी कर रहे हैं तथा 10 लोग सरकारी सेवाओं से जुड़े हैं। कौशल विकास कार्यक्रमों के तहत 150 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण के लिए आवेदन पत्र दिए गए, जिनमें से 39 युवाओं ने पंजीकरण कराया है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पिछले शैक्षणिक सत्र में 84 बच्चों का विद्यालयों में प्रवेश कराया गया था। वर्तमान सत्र में 100 से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत अब तक 80 बच्चों का नामांकन हो चुका है। खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 50 से अधिक बच्चे और युवा स्टेडियम में नियमित अभ्यास कर रहे हैं। क्रीड़ा विभाग ने फुटबॉल, क्रिकेट और बॉक्सिंग के लिए 150 बच्चों का पंजीकरण किया है तथा 90 बच्चों को खेल सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत 600 परिवारों का सर्वे कराया गया है। नौ स्वास्थ्य शिविरों में 2,969 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। अब तक 3,544 आयुष्मान आईडी और 1,340 आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। इसके अलावा 290 बच्चों का पूर्ण टीकाकरण कराया गया है।

समाज कल्याण विभाग द्वारा 90 बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन, 125 महिलाओं को निराश्रित पेंशन, 14 परिवारों को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना तथा 10 बालिकाओं को कन्या सुमंगला योजना का लाभ दिया गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 81 पात्र गृहस्थी और सात अंत्योदय राशन कार्ड भी बनाए गए हैं।

बस्ती के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए खाली भूमि पर पार्क और ओपन जिम विकसित करने की योजना तैयार की गई है। इसके साथ ही नए बिजली कनेक्शन और स्ट्रीट लाइटें भी लगाई गई हैं। विकास कार्यों की नियमित निगरानी के लिए 'भातू समुदाय उत्थान समिति' का गठन किया गया है, जिसकी मासिक बैठकों में प्रगति की समीक्षा की जाती है।

जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने कहा कि भातू और हबूड़ा बस्ती को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर मॉडल कॉलोनी के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक उपेक्षा और सामाजिक चुनौतियों का सामना करने वाले इन परिवारों को सम्मानजनक जीवन, शिक्षा, रोजगार और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह बस्ती अपने सकारात्मक बदलाव और सामाजिक पुनर्वास के लिए पूरे देश में एक उदाहरण बनेगी।

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