बेंगलुरु , अगस्त 13 -- राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) के आपराधिक विधि एवं सैन्य विधि संकाय के निदेशक सुनील कवीश्वर ने कहा है कि भारत को तेजी से परिष्कृत होते धन शोधन, आतंकवाद के वित्तपोषण और सीमा पार वित्तीय अपराधों से बैंकों, वित्तीय संस्थानों तथा व्यापक अर्थव्यवस्था की रक्षा करने में सक्षम एक विशेष पेशेवर कार्यबल की आवश्यकता है।

श्री कवीश्वर ने गुरूवार को पत्रकारों से कहा कि इसी पृष्ठभूमि में, आरआरयू ने वित्तीय और आर्थिक सुरक्षा में अपने स्नातकोत्तर कार्यक्रम (एमएफईएस) को वित्तीय अपराध अनुपालन, जोखिम प्रबंधन और आर्थिक सुरक्षा में पेशेवरों का एक राष्ट्रीय कैडर बनाने के उद्देश्य से एक विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम के रूप में स्थापित किया है।

उन्होंने कहा कि एक वर्ष के इस पूर्णकालिक स्नातकोत्तर कार्यक्रम की फीस तीन लाख रुपये है और अगले बैच में कम से कम 60 छात्रों के शामिल होने की उम्मीद है, जिसमें 10-20 अन्य प्रतिभागी संभावित रूप से अन्य देशों से आ सकते हैं। यह कार्यक्रम भारत के वित्तीय-सुरक्षा नियमों और उन्हें लागू करने के लिए खास विशेषज्ञता वाले पेशेवरों की उपलब्धता के बीच बढ़ते अंतर को दूर करने के लिए तैयार किया गया था।

श्री कवीश्वर ने कहा, "भारत को ऐसे लोगों की जरूरत है जो वित्तीय अपराध के जोखिम को समझें और जुनून के साथ अनुपालन या जोखिम प्रबंधन को एक क्षेत्र के रूप में अपनाएं।" उन्होंने धन शोधन, आतंकवाद के वित्तपोषण, रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और मादक पदार्थों तथा हथियारों की तस्करी से जुड़े अवैध लेनदेन से वित्तीय संस्थानों को सुरक्षित करने में सक्षम एक बड़ा राष्ट्रीय कार्यबल तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि वैश्विक मानकों और भारतीय कानूनों से लेकर संस्थागत अनुपालन, जांच और प्रवर्तन तक एमएफईएस पाठ्यक्रम संपूर्ण वित्तीय-सुरक्षा श्रृंखला में पेशेवरों को प्रशिक्षित करने का प्रयास करता है। इसमें संयुक्त राष्ट्र, एफएटीएफ और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के ढांचे के अलावा धन शोधन निवारण अधिनियम, भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम सहित भारतीय कानून शामिल हैं।

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