बैतूल , मार्च 1 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के मुलताई स्थित प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खंड अदालत ने करंट लगने से किसान की मौत के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने अवैध रूप से बिजली तार बिछाने वाले प्रतिवादी को दोषी ठहराते हुए मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही तीन नवंबर 2018 से भुगतान की तिथि तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

अदालत के अभिलेख के अनुसार घटना 23 अक्टूबर 2015 को दोपहर लगभग एक से डेढ़ बजे के बीच ग्राम परमंडल में हुई थी। किसान जगदीश झाड़े अपने खेत में सिंचाई कार्य कर रहे थे, तभी उन्हें करंट लग गया, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि प्रतिवादी शिवलू चौरे ने बिजली के खंभे से अवैध रूप से तार जोड़कर अपने खेत में सिंचाई के लिए बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की थी। यह तार अन्य किसानों के खेतों से होकर मिट्टी में दबाया गया था, लेकिन बीच में तार का आवरण क्षतिग्रस्त होने के कारण वह खुला पड़ा था। इसी असुरक्षित तार की चपेट में आने से किसान की मौत हुई।

घटना के बाद थाना मुलताई में भारतीय दंड संहिता की धारा 304ए के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके पश्चात मृतक के परिजनों ने सिविल न्यायालय में मुआवजे का दावा प्रस्तुत किया।

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि बिजली कंपनी अथवा उसके अधिकारियों की लापरवाही के पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए, इसलिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने अवैध रूप से तार बिछाने वाले व्यक्ति को ही दुर्घटना के लिए उत्तरदायी माना।

न्यायालय ने वादी पक्ष को आंशिक रूप से सफल मानते हुए प्रतिवादी को पांच लाख रुपये मुआवजा एवं निर्धारित ब्याज राशि अदा करने का आदेश दिया। साथ ही दोनों पक्षों को अपना-अपना व्यय स्वयं वहन करने के निर्देश दिए।

ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध बिजली कनेक्शन और असुरक्षित तारों से होने वाली दुर्घटनाओं के संदर्भ में इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायालय के इस आदेश से स्पष्ट संदेश गया है कि अवैध बिजली उपयोग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने पर संबंधित व्यक्ति को कानूनी दायित्व और आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित