चंडीगढ़ , अक्टूबर 10 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने अवैध खनन मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने के पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले को आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की विफलता का प्रमाण बताया और आरोप लगाया कि राज्य में प्राकृतिक संसाधनों का अवैध दोहन हो रहा है तथा सरकारी निगरानी व्यवस्था पूरी तरह नाकाम रही है।
श्री ढिल्लों ने कहा कि उच्च न्यायालय ने इस बात पर सवाल उठाये कि 110 फुट ऊंचे पहाड़ गायब हो गये, लेकिन सरकारी अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह स्थिति राज्य में प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। होशियारपुर जिले में पंजीकृत 31 पत्थर क्रशरों में से 26 चालू थे। जिला खनन अधिकारी की ओर से अदालत में दाखिल हलफनामे के मुताबिक कोई भी स्वीकृत वाणिज्यिक खनन स्थल, भूमि मालिकों का स्थल या क्रशर खनन स्थल चालू नहीं था। उन्होंने कहा कि अदालत ने क्रशरों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के स्रोतों के बारे में विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं होने पर भी सवाल उठाए।
श्री ढिल्लों ने पूछा कि यदि कोई भी स्वीकृत स्थल चालू नहीं था, तो 26 क्रशरों में इस्तेमाल होने वाला खनिज कहां से आ रहा था? उन्होंने कहा कि इन सवालों से सरकार की निगरानी व्यवस्था की खामियां उजागर होती हैं। यदि संबंधित सरकारी विभाग अपनी जिम्मेदारियां ठीक से निभा रहे होते, तो इतने बड़े मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि अवैध खनन केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं है, बल्कि इससे पहाड़ों, नदी क्षेत्रों और भूमि का प्राकृतिक संतुलन भी प्रभावित होता है। अनियंत्रित खुदाई से भूगर्भीय संरचना को नुकसान पहुंच सकता है और लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि पंजाब के प्राकृतिक संसाधन किसी सरकार या निजी संस्था की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों की साझा विरासत हैं। उन्होंने कहा कि इन संसाधनों के दोहन और लूट को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आप सरकार पर राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात है। उन्होंने पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने चुनाव से पहले रेत और बजरी के खनन से राज्य को 20,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का वादा किया था। उन्होंने दावा किया कि सरकार के प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य के खजाने में इस मद से करीब 600 करोड़ रुपये ही आए। उन्होंने सवाल किया, "बाकी 19,400 करोड़ रुपये कहां गए और यह पैसा राज्य के खजाने तक क्यों नहीं पहुंचा?" उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को इन सवालों का स्पष्ट जवाब जनता को देना चाहिए।
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