, March 10 -- संसदीय कार्यमंत्री तथा भाजपा नेता किरण रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुत मजबूत हैं और उन्हें कमजोर बनाने और कमजोर दिखाने का प्रयास विपक्ष द्वारा किया जा रहा है लेकिन पूरी दुनिया जानती है कि श्री मोदी कितने मजबूत हैं।
श्री रिजिजू के कांग्रेस की श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा का नाम पर लेने पर श्रीमी वाड्रा ने कहा कि उन्हें आश्चर्य हुआ कि जिन लोगों ने हमेशा पंडित जवाहर लाल नेहरू को कोसा है उन्होंने आज अचानक पूर्व प्रधानमंत्री की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी सत्ता पक्ष के सामने 12 साल से मजबूती से खड़े हैं और वह जो सच बोलते हैं वह सत्ता पक्ष को पचता नहीं है।
समाजवादी पार्टी के राजीव राय ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अच्छा इंसान बताया और कहा कि वह विषम परिस्थितियों में भी सदस्यों को बोलने का अवसर देते हैं लेकिन सत्ता पक्ष ने अध्यक्ष नाम की संस्था को कमजोर कर दिया है। सत्ता पक्ष ने अध्यक्ष के साथ नाइंसाफी की है और उन्हें अकेले छोड़ा हुआ है। उनके सहयोग के लिए उपाध्यक्ष तक नहीं है सिर्फ नौ लोगों का पैनल बनाया गया है। सवाल है कि उनकी मदद के लिए उपाध्यक्ष क्यों नहीं बनाया गया। यह बहुत बड़ा मुद्दा है और सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। उनका कहना था कि लोकसभा अध्यक्ष के अधिकार में पहले लोकसभा टीवी होता था लेकिन उनके उस अधिकार को भी छीन लिया गया है। संसदीय सुरक्षा का मसला था वह भी छीन लिया गया है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले लोकसभा में तीन बार अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव आए हैं और तीनों बार अविश्वास के प्रस्ताव गिरे हैं। इस बार भी सरकार का बहुमत है। विपक्ष भी यह जानता है लेकिन उनका मकसद देश को बताना है कि किस तरह से मनमानी चल रही है और इस प्रस्ताव के जरिए विपक्ष इसी पक्ष को देश के समक्ष रखेगा। उनका कहना था कि सरकार ने लोकसभा के अधिकार छीन लिए हैं और उनका संरक्षण जरूरी है इसलिए विपक्ष इस मुद्दे को चर्चा के लिए लाया है।
तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने कहा कि अध्यक्ष का अधिकार सबके साथ समान व्यवहार के साथ सदन का संचालन करना होता है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले मावलंकर जी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया था क्योंकि मावलंकर जी सरकार के प्रवक्ता के रूप में काम करने लगे थे। उसके बाद लोकसभा अध्यक्ष हुकुम सिंह और फिर बलराम जाखड़ के खिलाफ भी प्रस्ताव आया था तो तब उपाध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही का संचालन किया था लेकिन अब जो अध्यक्ष हैं उनका कोई सहयोगी नहीं हैं। उनके साथ उपाध्यक्ष नहीं है। यहां सिर्फ अध्यक्ष ही होते हैं जो हर दिन एक ही बात दोहराते हैं। स्थगन प्रस्ताव को लेकर उनका एक ही वाक्य रहता है कि किसी भी प्रस्ताव को अनुमति नहीं दी गई है। उनका कहना था कि अध्यक्ष ने कुछ विधेयक पारित करवाए हैं और वह तरीका संविधान के अनुकूल नहीं था।
श्रीमती मोइत्रा ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का काम करती है और सदन में श्री बिरला इस काम में सरकार का बखूबी साथ देते हैं। सत्ता पक्ष के लोगों को बोलने दिया जाता है लेकिन विपक्ष के लोगों को बोलने नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि यह कैसा लोकतंत्र है जहां लोकसभा अध्यक्ष खुद प्रधानमंत्री को सदन में इसलिए आने से रोकते हैं कि उन्हें महिला सांसदों से खतरा है।
डीएमके के टी आर बालू ने कहा कि मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा है और जब लोकसभा में विपक्ष के नेता इस मुद्दे को उठाते हैं तो कह दिया जाता है कि जिस किताब का उल्लेख किया जा रहा है वह किताब छपी ही नहीं है। अध्यक्ष इस तरह का बर्ताव कर सत्ता पक्ष का संरक्षण करते हैं। इससे पहले मावलंकर, हुकुम सिंहजी तथा बलराम जाखड़जी के खिलाफ प्रस्ताव आये थे। उनका कहना था कि सदन बहुमत से चलता है और किसी को भी सदन में पक्षपात नहीं करना चाहिए और निष्पक्ष होकर सदन चलाना चाहिए।
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