नयी दिल्ली , मई 29 -- पिछले एक दशक में अवसंरचनाओं के विकास पर लगभग 360 अरब डॉलर खर्च किये गये हैं जिससे लॉजिस्टिक्स पर होने वाला खर्च घटकर जीडीपी के 10 प्रतिशत पर आ गया है।
उद्योग संगठन सीआईआई और नाइट फ्रैंक की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक दशक में अवसंरचना विकास पर लगभग 360 अरब डॉलर का संचयी निवेश किया गया है। इसमें सार्वजनिक और निजी निवेश दोनों शामिल हैं। इससे लॉजिस्टिक्स लागत में भारी बचत हुई है।
सीआईआई मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्टेशन एंड लॉजिस्टिक्स समिट की इस साझा रिपोर्ट के अनुसार, एक दशक पहले देश की जीडीपी का 13-14 प्रतिशत लॉजिस्टिक्स पर खर्च होता था। अब यह आंकड़ा घटकर 10-10.7 प्रतिशत रह गया है। इससे देश की अर्थव्यवस्था को हर साल 123-133 अरब डॉलर की बचत का अनुमान है। इसी का परिणाम है कि वैश्विक लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स (एलपीआई) में भारत की रैंकिंग 2014 के 54वें स्थान से बढ़कर 2023 में 38वें स्थान पर पहुंच गयी है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन सुधारों के बावजूद देश की लॉजिस्टिक्स आपूर्ति श्रृंखला अब भी सर्वोत्तम दक्षता हासिल नहीं कर पायी है। इसके लिए मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी पहलों को आगे बढ़ाने की सलाह दी गयी है।
सीआईआई-नाइटफ्रैंक का मानना है कि साल 2047 तक माल परिवहन के उस समय के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए देश को 216 मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क की जरूरत होगी, जिनमें प्रत्येक की औसत क्षमता 160-170 लाख टन प्रतिवर्ष होगी। सड़क मार्ग पर अतिरिक्त निर्भरता कम करके दूसरे माध्यमों - जैसे रेल और नदी मार्ग - को अपनाने की भी जरूरत बतायी गयी है।
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